सूक्ष्म गुरुत्व में अंकुरण और पौधों की वृद्धि पर हो रहा शोध, चिकित्सा और कृषि में मिलेंगे नए आयाम
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने एक्सिऑम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर वैज्ञानिक प्रयोगों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने अंतरिक्ष की सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थिति में मेथी और मूंग के बीजों का अंकुरण कर यह जानने का प्रयास किया है कि धरती से अलग वातावरण में जैविक विकास किस प्रकार होता है। यह प्रयोग भविष्य की अंतरिक्ष कृषि और चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा देगा।
नई दिल्ली (ए)। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, जो इन दिनों एक्सिऑम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (ISS) पर हैं, लगातार प्रयोगों में जुटे हैं। 14 दिवसीय इस अंतरिक्ष यात्रा के दौरान उन्होंने एक अनूठा प्रयोग करते हुए मेथी और मूंग के बीजों को माइक्रोग्रैविटी में अंकुरित किया। इस प्रक्रिया के तहत अंकुरण शुरू हो चुका है और बीजों को स्टोरेज फ्रीजर में संरक्षित कर लिया गया है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में पौधों की प्रारंभिक वृद्धि और जैविक गुणधर्मों में क्या बदलाव आता है।
धरती पर वापसी जल्द संभावित
शुभांशु और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री अब तक 12 दिन का प्रवास पूरा कर चुके हैं। 10 जुलाई के बाद किसी भी दिन उनकी वापसी संभावित है, जो मौसम और शारीरिक स्थिति पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि यह मिशन 25 जून को स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से लॉन्च किया गया था।
वैज्ञानिकों के लिए नई राहें
इस प्रयोग को लेकर शुभांशु ने एक्सिऑम स्पेस की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. लूसी सेंट्स से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह अध्ययन वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक नई दिशा तय करेगा। इस प्रयोग से यह समझने में मदद मिलेगी कि सूक्ष्म गुरुत्व में बीजों की वृद्धि दर, अंकुरण क्षमता और पोषण स्तर में किस प्रकार के बदलाव आते हैं।
स्टेम सेल पर भी हो रहा शोध
अंतरिक्ष में शुभांशु का एक अन्य प्रयोग स्टेम सेल से संबंधित है। उन्होंने बताया कि इन कोशिकाओं के व्यवहार में अंतरिक्ष के वातावरण में होने वाले बदलाव भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित हो सकते हैं। यह परीक्षण यह जानने का प्रयास है कि क्या पृथ्वी पर इन कोशिकाओं को अधिक उपयोगी तरीके से लागू किया जा सकता है।