हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर डेढ़ महीने से पुलिस की पकड़ से बाहर, कई पीड़ित डर से चुप थे अब कर रहे खुलासे
राजधानी रायपुर में कर्ज देने की आड़ में शोषण और भय का साम्राज्य खड़ा करने वाले सूदखोर रोहित तोमर पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है। 2 लाख के कर्ज पर 35 लाख वसूलने के मामले में उसके खिलाफ सातवीं एफआईआर दर्ज की गई है। लेकिन सवाल अब भी बरकरार है — डेढ़ महीने से फरार इस हिस्ट्रीशीटर को पुलिस अब तक क्यों नहीं पकड़ पाई?
रायपुर। रायपुर के कंस्ट्रक्शन मटेरियल सप्लायर भोपाल मणि साहू ने बीते दिनों एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए सूदखोर रोहित तोमर के खिलाफ पुरानी बस्ती थाने में एफआईआर दर्ज करवाई। व्यापारी ने आरोप लगाया कि उन्होंने सिर्फ 2 लाख रुपए 3% मासिक ब्याज पर उधार लिए थे, लेकिन आरोपी ने उनसे अलग-अलग माध्यमों से करीब 35 लाख रुपए वसूल लिए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि रोहित तोमर ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल पर गालियां दीं और जान से मारने की धमकियां भी दीं। इतना ही नहीं, तोमर अपने गुर्गों—दिव्यांश, आकाश और योगेश सिन्हा के साथ कई बार उसके घर पहुंचा और बदसलूकी की। व्यापारी का आरोप है कि पैसे लेने के बाद उनसे कोरे स्टाम्प पर हस्ताक्षर भी करवाए गए। कभी साईं विला बुलाकर धमकाया गया तो कभी हर रोज़ ब्याज चुकाने का दबाव बनाया गया।

इससे पहले नारायणपुर जिले के एक अन्य पीड़ित ने भी तोमर के खिलाफ शिकायत की थी। उन्होंने 10 लाख का कर्ज लेकर ब्याज समेत 1.10 करोड़ रुपए चुकाने की बात कही थी। पुलिस का कहना है कि डर के मारे कई पीड़ित अब तक सामने नहीं आ पा रहे थे, लेकिन कार्रवाई शुरू होने के बाद अब धीरे-धीरे लोग सामने आ रहे हैं।
‘गोल्डन मैन’ की अंधेरी दुनिया
रोहित तोमर, जिसे स्थानीय लोग ‘गोल्डन मैन’ के नाम से जानते हैं, दरअसल पुलिस रिकॉर्ड में निगरानी बदमाश है। उस पर तेलीबांधा, राजेंद्र नगर, पुरानी बस्ती, कोतवाली और गुढ़ियारी थानों में 9 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज हैं—जिनमें सूदखोरी, ब्लैकमेलिंग, मारपीट और अवैध वसूली शामिल हैं।
गोलीकांड से लेकर जुलूस तक—रोहित का आपराधिक सफर
लगभग एक साल पहले रायपुर के हाईपर क्लब में हुए गोलीकांड के मामले में भी रोहित तोमर गिरफ्तार हो चुका है। तब पुलिस ने उसकी सार्वजनिक गिरफ्तारी करते हुए सिर आधा मुंडवा कर और फटे कपड़ों में जुलूस निकाला था। उसके साथ विकास अग्रवाल, सारंग मांधान और अमित तनेजा को भी पकड़ा गया था।