12,500 करोड़ की लागत से तैयार निसार जंगल, धुआं, बादल और अंधेरे में भी करेगा धरती की निगरानी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने बुधवार, 30 जुलाई को संयुक्त रूप से विकसित किए गए अब तक के सबसे महंगे और उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘निसार’ को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। यह उपग्रह घने जंगलों, बादलों और अंधेरे में भी पृथ्वी की सतह पर हो रहे परिवर्तनों की निगरानी करेगा।
निसार का पूर्ण नाम NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar है। इसे भारत के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शाम 5:40 बजे GSLV-F16 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया। निसार को 747 किमी ऊंचाई की सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया गया, जहां से यह 97 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर लगाएगा।
निसार मिशन के प्रमुख उद्देश्य:
- धरती और बर्फ की सतह में बदलाव जैसे – ग्लेशियरों का पिघलना, भूस्खलन, जमीन का धंसना।
- पर्यावरण और पारिस्थितिक तंत्र की निगरानी – जंगल, खेती योग्य भूमि और जैव विविधता का अध्ययन।
- समुद्री क्षेत्र की ट्रैकिंग – लहरों की गति, समुद्र का व्यवहार और तटीय बदलाव।
- यह सभी डेटा ओपन-सोर्स के रूप में वैज्ञानिकों और आम जनता के लिए उपलब्ध रहेगा।
पारंपरिक सैटेलाइट्स से कैसे अलग है निसार?
निसार हर मौसम में काम कर सकता है – बादल, धुआं या रात का अंधेरा भी इसे बाधित नहीं कर सकते। यह धरती की सतह पर सेंटीमीटर स्तर के बदलावों को भी माप सकता है।
जैसे:
- हरा रंग: ज़मीन थोड़ी ऊंची हुई
- लाल: ज़मीन 15 सेमी ऊपर उठी
- नीला: ज़मीन नीचे धंसी
- पर्पल: ज़मीन 10 सेमी नीचे गई
तकनीकी विशेषताएं:
- 12 मीटर का गोल्ड प्लेटेड रडार एंटीना, जो 9 मीटर लंबी बूम से जुड़ा है
- पहली बार कोई सैटेलाइट दोहरी रडार तकनीक (L-बैंड और S-बैंड) से लैस है
- L-बैंड (24 सेमी वेवलेंथ): घने जंगलों के आर-पार देखने में सक्षम
- S-बैंड (9 सेमी वेवलेंथ): सतही परिवर्तनों की सटीक निगरानी
📈 महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में:
🛰️ नाम: निसार (NISAR)
🚀 लॉन्च यान: GSLV-F16
🌐 ऑर्बिट: सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट
🕒 पृथ्वी की परिक्रमा: हर 97 मिनट में
🗓️ मिशन अवधि: 5 वर्ष
💰 लागत: 1.5 बिलियन डॉलर (~₹12,500 करोड़)