शिवमहापुराण कथा में बोले पं. प्रदीप मिश्रा— ‘भारत भूमि है स्वर्ग का प्रवेश द्वार, नारी में बसते हैं शिव के सात रूप’
भिलाई | भिलाई का जयंती स्टेडियम शनिवार को शिवभक्ति के रंग में पूरी तरह रंग गया, जब अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा की शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धा की लहरें जनसमूह के रूप में उमड़ पड़ीं। पंडालों के भीतर ही नहीं, बाहर तक बैठे हजारों भक्तों ने शिव की कथा का रसपान किया।

कथा की शुरुआत में पं. मिश्रा ने सावन को ‘श्रद्धा, समर्पण और शिव को पाने का महीना’ बताया। उन्होंने कहा— “सावन में एक चावल का दाना भी महादेव को अर्पित किया जाए, तो वे कृपा करने से पीछे नहीं हटते।” उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विशेषताओं पर जोर देते हुए कहा, “विदेशों में मृत्यु ‘एक्सपायर’ कहलाती है, जबकि भारत में लोग ‘स्वर्गवासी’ होते हैं— क्योंकि भारतभूमि ही मोक्ष का प्रवेशद्वार है।”
इस भव्य आयोजन की व्यवस्था बोल बम सेवा समिति द्वारा श्री दया सिंह के नेतृत्व में की गई थी। पं. मिश्रा ने समिति की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल कथा नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन की अनुभूति है।

पं. मिश्रा ने नारी के सात रूपों का वर्णन करते हुए कहा कि शिव स्वयं स्त्री के भीतर कीर्ति, सौंदर्य, मधुर वाणी, स्मरण शक्ति, धारण शक्ति, धैर्यता और क्षमा के रूप में विद्यमान रहते हैं। उन्होंने कहा, “नारी चाहे जितना सहन करे, वह सब कुछ क्षमा कर देती है— यही उसकी शिवमयी प्रकृति है।”

कथा में उन्होंने यह भी बताया कि मां पार्वती ने शिव को पाने के लिए वर्षों कठिन तप किया, सात परीक्षाएं दीं। “मनुष्य यदि गिर जाए, तो महादेव के नाम का सहारा लेकर फिर उठ सकता है। संसार में पूर्णता केवल शिव में है,” पं. मिश्रा ने कहा। इस विशाल आयोजन में अयोध्या सांसद बृजभूषण शरण सिंह, कुश्ती संघ अध्यक्ष संजय सिंह, विधायक धरमलाल कौशिक, महापौर नीरज पाल, दूधाधारी मठ के महंत रामसुंदर दास, दुर्ग संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर और भिलाई निगम आयुक्त राजीव पांडेय समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।