29 सितंबर को सप्तमी तिथि पर देवी कालरात्रि की पूजा, नवपत्रिका स्नान और सरस्वती आह्वान से भक्त करेंगे ज्ञान व शक्ति की साधना; बन रहे हैं सौभाग्य और शोभन जैसे शुभ योग।
आश्विन मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि यानी सोमवार को महासप्तमी मनाई जाएगी। यह दिन नवरात्रि का अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है, क्योंकि इसी दिन दुर्गा पूजा की मुख्य रस्में आरंभ होती हैं। सप्तमी पर जहां मां दुर्गा की सातवीं शक्ति ‘कालरात्रि’ की पूजा होती है, वहीं शुभ योग में मां सरस्वती का आह्वान भी किया जाएगा। नवपत्रिका स्नान और विशेष पूजा विधियों के कारण यह तिथि शक्ति और ज्ञान की उपासना का अद्भुत संगम मानी जाती है।
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सोमवार को पड़ रही है। इस दिन महासप्तमी पर्व मनाया जाएगा, जिसे दुर्गा पूजा का पहला प्रमुख दिन भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सप्तमी पर माता दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि की पूजा की जाती है और साथ ही माता सरस्वती का आह्वान भी किया जाता है।
शुभ योग में पूजा
पंचांग के अनुसार, इस दिन सौभाग्य योग, शोभन योग और बुधादित्य योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:36 तक रहेगा, जबकि राहुकाल सुबह 7:43 से 9:13 तक होगा। सप्तमी तिथि 29 सितंबर शाम 4:31 बजे तक रहेगी, जिसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इन शुभ संयोगों में देवी आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
सरस्वती आह्वान और पूजा विधि
नवरात्रि के दौरान सप्तमी को विशेष रूप से सरस्वती आह्वान का दिन माना जाता है। इस दिन भक्त मां सरस्वती को पूजा के लिए आमंत्रित करते हैं। सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर साफ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को शुद्ध किया जाता है। मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। सफेद फूल और मिठाई चढ़ाना विशेष शुभ माना जाता है। ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जप कर आरती की जाती है।
दुर्गा पूजा का पहला प्रमुख दिन – नवपत्रिका स्नान
महासप्तमी के दिन नवपत्रिका पूजा का विशेष महत्व है। इसमें केले, नारियल, हल्दी, अनार, अशोक, धान, बिल्व, मनका और जौ की पत्तियों को एकत्र कर लाल धागे से बांधा जाता है। इन्हें नदी में स्नान कराया जाता है, जिसे महास्नान कहते हैं। इसके बाद इन्हें सजाकर मां दुर्गा की प्रतिमा के दाईं ओर स्थापित किया जाता है। यह पूजा देवी दुर्गा को आमंत्रित करने और प्रकृति के नौ रूपों को देवी शक्ति के प्रतीक मानकर आराधना करने की परंपरा है।
आध्यात्मिक महत्व
महासप्तमी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शक्ति और ज्ञान की उपासना का विशेष पर्व है। सरस्वती आह्वान से भक्त विद्या, कला और बुद्धि की कृपा प्राप्त करते हैं, जबकि नवपत्रिका पूजा प्रकृति और देवी शक्ति के बीच गहरे संबंध को दर्शाती है। इस प्रकार महासप्तमी का दिन नवरात्रि में भक्ति, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का प्रमुख आधार माना जाता है।