‘खादी कारीगर महोत्सव’ में गृह मंत्री ने कहा—मोदी सरकार ने खादी को नया जीवन दिया; 11 वर्षों में कारोबार 33 हजार करोड़ से बढ़कर 1.70 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि खादी केवल पोशाक नहीं, बल्कि स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी के बाद उसने खादी और उसके कारीगरों को भुला दिया। शाह ने यह बात ‘खादी कारीगर महोत्सव’ को संबोधित करते हुए कही, जहां उन्होंने खादी को पुनर्जीवित करने में मोदी सरकार की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
नई दिल्ली (ए)। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि महात्मा गांधी ने खादी को केवल वस्त्र नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी चेतना का प्रतीक बनाया था। लेकिन आजादी के बाद कांग्रेस ने इस पर ध्यान नहीं दिया और इसके प्रचार-प्रसार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए खादी को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने ‘मन की बात’ के माध्यम से नागरिकों से खादी अपनाने का आग्रह किया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।
शाह ने बताया कि 2014-15 में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग का कारोबार 33,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.70 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह न केवल बुनकरों को रोजगार दे रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहा है।
कांग्रेस पर सीधा हमला
शाह ने कहा, “कांग्रेस ने खादी के महत्व को भुला दिया, जबकि मोदी सरकार ने इसे राष्ट्रीय आंदोलन के प्रतीक के रूप में पुनर्जीवित किया है।” उन्होंने कहा कि आजादी के बाद अगर खादी को निरंतर बढ़ावा दिया गया होता, तो देश को बेरोजगारी जैसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।
‘स्वदेशी से स्वावलंबन’ का संदेश
कार्यक्रम में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में आयोजित ‘खादी कारीगर महोत्सव’ के दौरान 2200 से अधिक कारीगरों को टूलकिट वितरित की गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत 301 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी भी बांटी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य था — ‘स्वदेशी से स्वावलंबन’।
खादी अपनाओ, आत्मनिर्भर बनो
शाह ने कहा, “खादी पहनना केवल परंपरा नहीं, यह आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ने का संकल्प है।”
उन्होंने देशवासियों से हर वर्ष कम से कम 5,000 रुपये के खादी उत्पाद खरीदने की अपील की, ताकि देश की अर्थव्यवस्था में स्वदेशी उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़े। गृह मंत्री ने कहा, “क्या हमारे घरों में खादी का तकिया कवर, तौलिया या नाइट ड्रेस नहीं हो सकता? अगर हर नागरिक थोड़ी-सी भी खादी अपनाए, तो यह लाखों गरीब परिवारों की आजीविका से जुड़ जाएगा।”
स्वराज से स्वदेशी तक
शाह ने कहा, “स्वराज की अवधारणा ‘स्वदेशी’ और ‘स्वभाषा’ के बिना अधूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी वस्तुएं अपनाने का आह्वान किया है और कई व्यापारी अब अपने शोरूम में विदेशी वस्तुएं नहीं रख रहे।”
उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विचार ग्रामीण भारत को नई ताकत देगा।