तीन वित्तीय वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट और चुनावी खर्च का ब्यौरा नहीं सौंपने पर संकट; राज्य निर्वाचन आयोग ने सुनवाई पूरी की
छत्तीसगढ़ की नौ क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों पर पंजीकरण रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इन दलों के खिलाफ सुनवाई पूरी कर ली है और अब अंतिम निर्णय केंद्रीय चुनाव आयोग लेगा। ये दल तीन वित्तीय वर्षों से अपने वार्षिक लेखा-जोखा और चुनावी खर्च की रिपोर्ट जमा नहीं कर पाए हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की नौ क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों के भविष्य पर अब फैसला केंद्रीय चुनाव आयोग करेगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने इन दलों के खिलाफ चल रही सुनवाई पूरी कर ली है। आरोप है कि इन दलों ने न तो पिछले तीन वित्तीय वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की और न ही विधानसभा व लोकसभा चुनावों में हुए खर्च का विवरण आयोग को सौंपा।
जिन दलों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है, उनमें भारत भूमि पार्टी, भारतीय जनता सेक्युलर पार्टी, भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच, छत्तीसगढ़ विकास गंगा राष्ट्रीय पार्टी, छत्तीसगढ़ समाज पार्टी, छत्तीसगढ़िया पार्टी, पिछड़ा समाज पार्टी यूनाइटेड और राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी शामिल हैं।
चुनाव आयोग के मुताबिक, इन दलों को वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के लिए क्रमशः 30 नवंबर 2022, 31 दिसंबर 2023 और 15 दिसंबर 2024 तक अपने वार्षिक खातों की रिपोर्ट जमा करनी थी। इसके साथ ही, चुनावों के दौरान हुए खर्च का ब्यौरा भी 75 से 90 दिनों के भीतर देना अनिवार्य था।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस लापरवाही पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किए। आयोग ने 9 अक्टूबर 2025 को इन दलों को सुनवाई का अवसर दिया, लेकिन कई दलों ने जवाब प्रस्तुत नहीं किया।
अब यह मामला केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजा गया है, जो एक महीने के भीतर यह तय करेगा कि इन पार्टियों की मान्यता बरकरार रखी जाए या उन्हें पंजीकृत दलों की सूची से हटाया जाए।
नियम क्या कहता है?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29ए के अनुसार, कोई भी राजनीतिक दल यदि निर्धारित समय पर अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट या चुनावी खर्च का विवरण जमा नहीं करता, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। यह प्रावधान राजनीतिक दलों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।