राज्यसभा सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ा विवाद, उमर अब्दुल्ला पर ‘वादा तोड़ने’ का आरोप; गठबंधन पर संकट के बादल
जब बिहार में कांग्रेस पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतरी है, वहीं जम्मू-कश्मीर में उसे अपने ही सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) से करारा झटका लगा है। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर मतभेद इस हद तक बढ़ गए कि कांग्रेस ने चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राहुल गांधी की साख पर भी असर डालने की आशंका जताई जा रही है।
नई दिल्ली (ए)। बिहार विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस को एक और सियासी झटका लगा है — वो भी उसके सहयोगी दल से। जम्मू-कश्मीर में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के बीच सीट बंटवारे का विवाद खुलकर सामने आ गया है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एनसी प्रमुख उमर अब्दुल्ला ने गठबंधन के वादे से मुकरते हुए पार्टी को “कमज़ोर और असुरक्षित सीट” दी। इसके विरोध में कांग्रेस ने साफ ऐलान किया है कि वह राज्यसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी।
रविवार को श्रीनगर में हुई कांग्रेस की कोर कमेटी बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष तारीक हामिद कर्रा ने कहा, “हमने सीट नंबर 1 या 2 की मांग की थी, लेकिन हमें सीट नंबर 4 दी गई, जो असुरक्षित है। इसलिए कांग्रेस इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि इस निर्णय की रिपोर्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी और आगे की रणनीति विधानसभा उपचुनावों के मद्देनज़र तय की जाएगी।
बैठक में वरिष्ठ नेता जीए मीर, रमन भल्ला, पीरजादा मोहम्मद सईद, मूला राम और चौधरी लाल सिंह मौजूद रहे। नेताओं ने पिछले एक साल में जम्मू-कश्मीर में जनता के मुद्दों की अनदेखी और “अप्रभावी प्रशासन” पर नाराज़गी भी जताई।
उधर, नेशनल कॉन्फ्रेंस पहले ही अपने तीन उम्मीदवारों — चौधरी मोहम्मद रमजान, सज्जाद अहमद किचलू और शम्मी ओबेरॉय — के नाम का ऐलान कर चुकी है। वहीं भाजपा ने भी अपनी ओर से सत्य शर्मा, राकेश महाजन और डॉ. अली मोहम्मद मीर को उम्मीदवार बनाया है।
राज्यसभा की चार सीटों के लिए 24 अक्टूबर को मतदान होना है। मौजूदा विधानसभा में एनसी-कांग्रेस गठबंधन के पास 52 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 27। इन हालात में कांग्रेस का चुनाव से हटना गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब बिहार में कांग्रेस अपने पुनरुत्थान की लड़ाई लड़ रही है, ऐसे में जम्मू-कश्मीर की यह दरार उसकी राष्ट्रीय रणनीति पर बुरा असर डाल सकती है।