एआईसीसी को पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट सौंप दी गई, 60 वर्ष से अधिक उम्र और पांच साल पूरे कर चुके अध्यक्षों को नहीं मिलेगा दोबारा मौका
कांग्रेस संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। प्रदेश के सभी 36 संगठन जिलों में नए जिला अध्यक्षों की घोषणा जल्द की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, केवल कुछ ही मौजूदा अध्यक्षों को दोबारा मौका दिया जाएगा, जबकि अधिकतर जिलों में नए चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है।
रायपुर। कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। छह महीने पहले नियुक्त किए गए 11 जिला अध्यक्षों में से 5 को दोबारा जिम्मेदारी मिलने की संभावना है, जबकि बाकी जिलों में नए नेताओं को मौका दिया जाएगा।
एआईसीसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने साफ कर दिया है कि जिन जिला अध्यक्षों ने पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है, उन्हें इस बार रिपीट नहीं किया जाएगा। इस मानक के चलते सरगुजा, रायपुर ग्रामीण और बेमेतरा सहित कई जिलों के अध्यक्षों को पद से मुक्त किया जा सकता है।
साथ ही यह भी तय किया गया है कि 60 वर्ष से अधिक आयु वाले नेताओं को जिलाध्यक्ष पद नहीं दिया जाएगा। इस कारण कई सीनियर नेता अपने आप ही दौड़ से बाहर हो गए हैं।
हाईकमान की बैठक में अंतिम निर्णय
पार्टी हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव को दिल्ली तलब किया है। बताया जा रहा है कि इन चारों नेताओं की बैठक राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की अध्यक्षता में होगी, जिसमें पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर चर्चा कर अंतिम नाम तय किए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, सभी पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट 17 अक्टूबर को एआईसीसी को सौंप दी थी। जिन जिला अध्यक्षों को दोबारा मौका मिल सकता है, उनमें दुर्ग ग्रामीण के राकेश ठाकुर और कोरबा ग्रामीण के मनोज चौहान के नाम प्रमुख हैं।
रायपुर शहर से 28 दावेदार
रायपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सर्वाधिक 28 आवेदन आए थे, जिनमें से 6 नामों का पैनल आलाकमान को भेजा गया है। अन्य जिलों में भी कई नए चेहरों ने आवेदन कर पार्टी की नई दिशा में काम करने की इच्छा जताई है।
नवंबर के पहले सप्ताह में होगी घोषणा
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान नवंबर के पहले सप्ताह में नई जिलाध्यक्षों की सूची जारी कर सकता है। पार्टी संगठन को नए सिरे से मजबूत करने के लिए यह बदलाव 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का हिस्सा माना जा रहा है।