मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार शाम 4.15 बजे करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस; अगले हफ्ते से देश के कई राज्यों में शुरू होगी प्रक्रिया, 20 साल बाद होगी इस पैमाने पर समीक्षा
चुनाव आयोग आज शाम 4.15 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) लागू करने की घोषणा करेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित रहेंगे। सूत्रों के अनुसार, SIR की शुरुआत अगले हफ्ते से 10 से 15 राज्यों में एक साथ की जाएगी। यह प्रक्रिया लगभग दो दशक बाद देशव्यापी स्तर पर की जा रही है।
नई दिल्ली। चुनाव आयोग देशभर में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (Special Intensive Revision – SIR) शुरू करने जा रहा है। आयोग आज इस संबंध में औपचारिक घोषणा करेगा। शुरुआती चरण में SIR उन राज्यों में लागू की जाएगी जहां अगले एक वर्ष के भीतर विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं — इनमें असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिन राज्यों में स्थानीय निकायों के चुनाव चल रहे हैं, वहां SIR फिलहाल नहीं की जाएगी क्योंकि वहां प्रशासनिक अमला चुनाव कार्यों में व्यस्त है। चुनाव समाप्त होने के बाद वहां प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
आयोग ने हाल ही में सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के साथ दो दौर की बैठकें कीं, जिनमें SIR की रूपरेखा और तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप दिया गया। कई राज्यों ने अपनी पिछली SIR की वोटर लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड की है। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली में आखिरी बार 2008 में और उत्तराखंड में 2006 में SIR की गई थी।
SIR का प्रमुख उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन करना, दोहरी प्रविष्टियों को हटाना और अवैध या अपात्र मतदाताओं की पहचान करना है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी है कि प्रत्येक मतदाता भारतीय नागरिक हो। आयोग का कहना है कि शहरीकरण और जनसंख्या गतिशीलता (migration) बढ़ने के कारण इस तरह की समीक्षा अब अनिवार्य हो गई है।
आंकड़ों के अनुसार, देश में वर्तमान में लगभग 99 करोड़ 10 लाख पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से लगभग 21 करोड़ मतदाताओं के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाना बाकी है। आयोग ने निर्देश दिया है कि बीएलओ (Booth Level Officers) घर-घर जाकर पूर्व-भरे फॉर्म मतदाताओं तक पहुंचाएंगे। इस प्रक्रिया में 31 दिसंबर तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं को भी शामिल किया जाएगा।
बिहार में इससे पहले SIR को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें विपक्ष ने सरकार पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी का आरोप लगाया था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां चुनाव आयोग की प्रक्रिया को वैध ठहराया गया।
आयोग का मानना है कि SIR से न केवल मतदाता सूची की पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में निष्पक्षता और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित होगी।