गांधी मैदान में भव्य शपथ समारोह; BJP कोटे से 14, जदयू से 8 और सहयोगी दलों से 4 मंत्री शामिल—13 नए चेहरों को भी मौका।
नीतीश कुमार ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। 26 मंत्रियों ने भी शपथ ली, जिनमें बीजेपी, जदयू और सहयोगी दलों को संतुलित प्रतिनिधित्व दिया गया है।
बिहार (ए) बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का कद हमेशा से अलग रहा है। लेकिन सोमवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब उन्होंने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर भारतीय राजनीति में एक अनूठा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
गांधी मैदान में हुए भव्य समारोह ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राज्य की सियासी धुरी अब भी नीतीश कुमार के अनुभव और रणनीति के इर्द-गिर्द ही घूमती है।
राष्ट्रीय स्तर की मौजूदगी से बढ़ा समारोह का कद
शपथ ग्रहण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ-साथ हरियाणा, असम, गुजरात, मेघालय, यूपी, नागालैंड, ओडिशा, दिल्ली और राजस्थान सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे।
शपथ के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से गमछा हिलाकर जनता का अभिवादन किया—यह दृश्य सियासी संदेशों से भरा हुआ था कि केंद्र और बिहार सरकार एक तालमेल के साथ आगे बढ़ रही है।
डिप्टी सीएम: सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा
समारोह में सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। दोनों नेताओं का चयन बीजेपी की रणनीति को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। सम्राट चौधरी जहां राज्य में भाजपा का आक्रामक चेहरा माने जाते हैं, वहीं विजय कुमार सिन्हा संगठन और प्रबंधन में अनुभवी माने जाते हैं।
कैबिनेट का स्वरूप: संतुलन और नए चेहरों का मिश्रण
नई सरकार में कुल 26 मंत्रियों को जगह मिली है। इसमें
14 बीजेपी से
8 जदयू से
लोेजपा (रामविलास) से 2
हम पार्टी से 1
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से 1 शामिल हैं।
इस कैबिनेट में एकमात्र मुस्लिम चेहरा भी शामिल है—जदयू के जमा खान, जिन्हें फिर से मंत्री बनाया गया है।
13 नए चेहरे: नई ऊर्जा का संकेत
नीतीश मंत्रिमंडल में इस बार 13 नए चेहरों को मौका दिया गया है। इनमें
रामकृपाल यादव
श्रेयसी सिंह
महत्वपूर्ण नाम हैं।
चिराग पासवान की पार्टी से दो विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इनमें संजय सिंह खास चर्चा में हैं, जिन्होंने महुआ सीट से लालू यादव के बेटे तेजप्रताप यादव को हराकर सुर्खियां बटोरी थीं।
राजनीतिक संकेत: नए गठबंधन की मजबूती
मंच पर चिराग पासवान का जेपी नड्डा और जीतनराम मांझी के पैर छूना सियासी रूप से एक मजबूत और भावनात्मक संदेश माना जा रहा है। इससे NDA में तालमेल और एकजुटता का संकेत मिलता है।