CBI की FIR से जुड़े केस में छापेमारी; मेडिकल कॉलेजों की मान्यता के लिए गोपनीय सूचना बेचने और हवाला के जरिए रिश्वत लेने का आरोप
देशभर में मेडिकल कॉलेज मान्यता घोटाले की परतें एक-एक कर खुल रही हैं। इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ सहित 10 राज्यों में 15 से अधिक स्थानों पर बुधवार को व्यापक तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई CBI द्वारा दर्ज किए गए उस मामले से जुड़ी है, जिसमें नेशनल मेडिकल कमीशन के अधिकारियों पर मेडिकल कॉलेजों को निरीक्षण से संबंधित गोपनीय जानकारी बेचने और हवाला के जरिए रिश्वत लेने के गंभीर आरोप सामने आए थे।
रायपुर। मेडिकल कॉलेज मान्यता घोटाले में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को छत्तीसगढ़ सहित 10 राज्यों में 15 से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर दस्तावेज़ और डिजिटल रिकॉर्ड कब्जे में लिए। रायपुर में दिल्ली से पहुंची ED टीम ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों से जुड़े ऑफिशियल रिकॉर्ड की गहन जांच की।
यह छापेमारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की 30 जून को दर्ज की गई FIR से जुड़े मामले का हिस्सा है। CBI ने इस केस में 3 डॉक्टरों समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। FIR के अनुसार, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के कुछ अधिकारी मेडिकल कॉलेजों को निरीक्षण से संबंधित गोपनीय जानकारी पहले से मुहैया कराते थे। इसके बदले वे लाखों रुपए की रिश्वत हवाला नेटवर्क के जरिए लेते थे।
सूत्रों के मुताबिक, इस गोपनीय जानकारी की मदद से कई मेडिकल कॉलेज पैरामीटर्स में हेरफेर कर निरीक्षण रिपोर्ट अपने पक्ष में तैयार कर लेते थे। ED ने जिन परिसरों पर तलाशी ली, उनमें 7 मेडिकल कॉलेज और कई आरोपियों के निजी आवास एवं दफ्तर शामिल हैं।
रायपुर के श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SRIMSR) का नाम भी इस पूरे घोटाले में प्रमुख रूप से सामने आया है। CBI ने आरोप लगाया था कि कॉलेज को मान्यता दिलाने के लिए निरीक्षण टीम के सदस्यों ने हवाला के जरिए 55 लाख रुपए की रिश्वत ली।
गिरफ्तार आरोपियों में डॉ. मंजप्पा सीएन, डॉ. चैत्रा एमएस, डॉ. अशोक शेलके, अतुल कुमार तिवारी, सथीश ए और रविचंद्र के. शामिल हैं। CBI की जांच के अनुसार, निरीक्षण दल के सभी सदस्य कॉलेज प्रशासन से मिलीभगत कर अनुकूल रिपोर्ट देने पर सहमत हुए थे।
जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. मंजप्पा ने हवाला ऑपरेटर से रिश्वत की रकम एकत्र कराने का जिम्मा सथीश ए को दिया था। वहीं डॉ. चैत्रा के हिस्से की रकम उनके घर पहुंचाई जानी थी। CBI ने बेंगलुरु में जाल बिछाकर 55 लाख रुपए की रिश्वत का पूरा नेटवर्क पकड़ लिया था। इसमें से 16.62 लाख रुपए डॉ. चैत्रा के पति रविन्द्रन से, जबकि 38.38 लाख रुपए सथीश ए. से बरामद किए गए थे।
CBI ने पांच महीने पहले कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश में 40 से अधिक स्थानों पर भी छापेमारी की थी। तब कई ऐसे दस्तावेज़ मिले थे, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि निरीक्षण टीम प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कई अलग-अलग रणनीतियों का इस्तेमाल कर रही थी। एजेंसियों का कहना है कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और महत्वपूर्ण खुलासे संभव हैं।