ड्रैगन को औकात याद दिलाई: चीन से आने वाले सस्ते स्टील पर लगा 3 साल का ‘महा-टैरिफ’… घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए भारत ने बिछाई ऐसी बिसात कि उड़ गई शी जिनपिंग की नींद!
देश–दुनिया(ए)। नए साल के स्वागत से ठीक पहले भारत ने वैश्विक व्यापार के मैदान में एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है, जिससे चीन और वियतनाम जैसे देशों में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ दबाव को बेअसर करने के बाद, अब भारत ने सीधे तौर पर चीन यानी ‘ड्रैगन’ को उसकी सीमाएं बता दी हैं। मोदी सरकार ने घरेलू स्टील इंडस्ट्री को सुरक्षा कवच देते हुए विदेशी बाजारों, खासकर चीन से आने वाले सस्ते और घटिया स्टील पर अगले 3 साल के लिए भारी आयात शुल्क (Safeguard Duty) लगाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।
3 साल का ‘टैरिफ चक्रव्यूह’: ऐसे फसेगा चीनी व्यापार
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा अधिसूचना के मुताबिक, भारत ने स्टील उत्पादों पर यह सुरक्षा शुल्क चरणबद्ध (Staggered) तरीके से लागू किया है। यह प्रहार इतना सटीक है कि चीन के लिए भारतीय बाजार में अपना सस्ता माल डंप करना अब नामुमकिन हो जाएगा:
पहला साल: 12% की भारी टैरिफ दर।
दूसरा साल: 11.5% का आयात शुल्क।
तीसरा साल: 11% की ड्यूटी। यह कदम सिर्फ टैक्स नहीं, बल्कि उन देशों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो सस्ते माल के दम पर भारतीय बाजार पर कब्जा करना चाहते थे। मुख्य रूप से चीन, वियतनाम और नेपाल से आने वाले स्टील शिपमेंट अब भारतीय कस्टम पर इस भारी टैक्स के दायरे में होंगे।
DGTR की जांच में हुआ बड़ा खुलासा: खतरे में थे भारतीय उद्योग!
यह फैसला कोई अचानक लिया गया कदम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी जांच छिपी है। डायरेक्टर जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने अपनी विस्तृत जांच में पाया कि पिछले कुछ समय में विदेशी स्टील के आयात में “अचानक और असामान्य” बढ़ोतरी हुई थी। चीन कम कीमतों और घटिया क्वालिटी के जरिए भारतीय स्टील उत्पादकों को बर्बाद करने की साजिश रच रहा था, जिससे निवेश और रोजगार पर काला साया मंडरा रहा था। इस खतरे को भांपते हुए सरकार ने 3 साल के कड़े टैरिफ की सिफारिश को तुरंत मंजूर कर लिया।
अमेरिका की हवा निकाली, अब चीन की बारी!
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर ऊंचे टैरिफ का दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन भारत ने अपनी मजबूत जीडीपी और बढ़ते निर्यात से यह साबित कर दिया कि वह किसी के दबाव में नहीं आने वाला। अब चीन को निशाना बनाकर भारत ने यह संदेश दे दिया है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की राह में जो भी देश रोड़ा बनेगा, उसे भारी कीमत चुकानी होगी। स्टील मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला न केवल टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू और सेल (SAIL) जैसी बड़ी कंपनियों को संजीवनी देगा, बल्कि लाखों छोटे स्टील कारोबारियों के हितों की भी रक्षा करेगा।
स्टील सेक्टर में दिवाली जैसा माहौल: शेयर बाजार में उछाल!
जैसे ही सरकार के इस फैसले की खबर आई, शेयर बाजार में स्टील सेक्टर के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई। टाटा स्टील और जिंदल स्टील जैसे दिग्गजों के शेयर 2 से 4 फीसदी तक उछल गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय स्टील की कीमतों में स्थिरता आएगी और देश ‘मेक इन इंडिया’ के तहत दुनिया का स्टील हब बनने की ओर तेजी से बढ़ेगा।