नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक उपस्थिति: देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की दिखेगी भव्य झलक
रायपुर(ए) । गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ राज्य अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का परचम लहराएगा। रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने मुख्य समारोह की परेड के लिए छत्तीसगढ़ की झांकी का चयन कर लिया है। इस वर्ष की झांकी का मुख्य आकर्षण नवा रायपुर स्थित देश का वह पहला ‘जनजातीय डिजिटल संग्रहालय’ होगा, जिसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती पर किया था। यह झांकी राज्य की समृद्ध विरासत को आधुनिकता के साथ जोड़कर प्रस्तुत करेगी।
‘वंदे मातरम्’ के मंत्र से गूंजेगी झांकी: स्वतंत्रता संग्राम के उन गुमनाम जनजातीय जननायकों को समर्पित होगी विशेष प्रस्तुति
छत्तीसगढ़ की यह झांकी भारत सरकार द्वारा निर्धारित थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ पर आधारित है। झांकी के माध्यम से उन आदिवासी वीर नायकों के संघर्ष और बलिदान को जीवंत किया गया है, जिन्होंने विदेशी हुकूमत के खिलाफ लोहा लिया। यह डिजिटल संग्रहालय की थीम पर बनी झांकी जनजातीय समाज की एकजुटता, अद्भुत साहस और देश के प्रति उनके अटूट प्रेम को दर्शाती है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को यह बताना है कि स्वतंत्रता की लड़ाई में छत्तीसगढ़ के वनांचलों का कितना महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का प्रदेश को संदेश: आदिवासी समाज की देशभक्ति और सिद्धांतों के सम्मान का ऐतिहासिक अवसर
झांकी के चयन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे गर्व और उत्साह का विषय बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस झांकी के माध्यम से पूरे देश को छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज की अद्भुत वीरता और अपने सिद्धांतों के लिए प्राण न्योछावर करने की महान परंपरा देखने को मिलेगी। उन्होंने इसे राज्य की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया, जिससे छत्तीसगढ़ के जनजातीय गौरव की कहानी घर-घर तक पहुँचेगी।
चार महीने का कड़ा परिश्रम और पांच चरणों की जटिल चयन प्रक्रिया: 17 श्रेष्ठ राज्यों की सूची में छत्तीसगढ़ ने बनाई अपनी जगह
जनसंपर्क विभाग के सचिव रोहित यादव और आयुक्त डॉ. रवि मित्तल के नेतृत्व में तैयार की गई इस झांकी को अंतिम स्वीकृति मिलना एक बड़ी उपलब्धि है। चयन की प्रक्रिया लगभग चार महीनों तक चली, जिसमें पांच कठिन चरणों से गुजरना पड़ा। रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के समक्ष झांकी के थ्रीडी मॉडल और विशिष्ट लोक संगीत को प्रस्तुत किया गया। समिति ने झांकी की अनूठी डिजाइन और विषयवस्तु की काफी प्रशंसा की, जिसके बाद देशभर के राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए छत्तीसगढ़ ने शीर्ष 17 राज्यों में अपनी जगह पक्की की।
परंपरा और तकनीक का अनूठा संगम: डिजिटल माध्यम से वीरता के गौरवशाली इतिहास को रोचक रूप में परोसेगा छत्तीसगढ़
जनसंपर्क अधिकारियों के अनुसार, यह झांकी केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास का एक दस्तावेज है। डिजिटल संग्रहालय की थीम होने के कारण इसमें तकनीक का भी सुंदर समावेश दिखेगा, जो आदिवासी विद्रोहों की गाथा को अधिक प्रेरणादायक और प्रभावशाली बनाता है। कर्तव्य पथ पर जब यह झांकी गुजरेगी, तो वह बस्तर से लेकर सरगुजा तक के वीर सेनानियों के उस अटूट साहस का प्रतिनिधित्व करेगी जिसने भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अपना अमूल्य योगदान दिया है।