मासूम अमायरा की मौत के बाद CBSE का सबसे बड़ा एक्शन: सुरक्षा मानकों में फेल होने पर स्कूल को दी ‘कड़ी सजा’
राजस्थान (ए) । राजस्थान की राजधानी जयपुर से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सीबीएसई (CBSE) बोर्ड ने जयपुर के प्रतिष्ठित ‘नीरजा मोदी स्कूल’ की मान्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है। यह सख्त कदम बीते 1 नवंबर को स्कूल परिसर में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना के बाद उठाया गया है, जहाँ चौथी क्लास में पढ़ने वाली मासूम छात्रा अमायरा ने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी थी। इस घटना के बाद छात्रा के परिजनों ने स्कूल प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। बोर्ड की उच्च स्तरीय जांच में स्कूल के भीतर सुरक्षा को लेकर कई डरावने सच सामने आए, जिसके बाद शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।
बोर्ड परीक्षाओं के मुहाने पर खड़े स्टूडेंट्स का क्या होगा? 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए CBSE का ‘सेफ्टी प्लान’
मान्यता रद्द होने की खबर फैलते ही हजारों अभिभावकों के बीच अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया है। सबसे बड़ा सवाल उन छात्रों के भविष्य पर था जो इस साल बोर्ड परीक्षा देने वाले हैं। हालांकि, सीबीएसई ने संवेदनशीलता दिखाते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान में 10वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है। इन बच्चों का साल खराब न हो, इसके लिए बोर्ड ने खास इंतजाम किए हैं। ये छात्र फरवरी-मार्च 2026 में होने वाली अपनी बोर्ड परीक्षाएं इसी स्कूल के माध्यम से दे सकेंगे। उनका स्कूल कोड, रोल नंबर और परीक्षा केंद्र पहले की तरह ही मान्य रहेंगे, ताकि उनकी वर्षों की मेहनत बर्बाद न हो।
9वीं और 11वीं के छात्रों के लिए ‘रेड अलर्ट’: 31 मार्च तक छोड़ना होगा स्कूल, दूसरे संस्थानों में लेना होगा दाखिला
जहाँ बोर्ड परीक्षार्थियों को राहत मिली है, वहीं 9वीं और 11वीं कक्षा के छात्रों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। नियमों के अनुसार, मान्यता रद्द होने के बाद ये छात्र अब इसी स्कूल से अगली कक्षा यानी 10वीं और 12वीं में प्रमोट नहीं हो पाएंगे। सीबीएसई के कड़े आदेश के मुताबिक, इन छात्रों को 31 मार्च 2026 तक किसी दूसरे मान्यता प्राप्त सीबीएसई स्कूल में अपना ट्रांसफर कराना अनिवार्य होगा। स्कूल प्रशासन पर अब नए दाखिले लेने पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। बोर्ड ने आश्वासन दिया है कि आसपास के स्कूलों में इन बच्चों के लिए जगह सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन अभिभावकों के लिए यह एक बड़ी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सबब बन गया है।

निगरानी और सुरक्षा की तीन बड़ी विफलताएं: क्यों रद्द हुई जयपुर के इस नामी स्कूल की मान्यता?
सीबीएसई की विस्तृत जांच रिपोर्ट ने स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। बोर्ड ने मान्यता रद्द करने के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं:
सुरक्षा और निगरानी में बड़ी लापरवाही: ‘तीसरी आंख’ की निगरानी से दूर था स्कूल परिसर
सीबीएसई की जांच रिपोर्ट में जो सबसे बड़ी खामी सामने आई, वह थी स्कूल परिसर में सीसीटीवी कैमरों का अभाव। बोर्ड के नियमों के मुताबिक, किसी भी बड़े स्कूल के हर कोने और संवेदनशील गलियारों में कैमरों का होना अनिवार्य है ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। नीरजा मोदी स्कूल में कैमरों की संख्या न केवल कम थी, बल्कि जो कैमरे लगे थे, वे भी पूरे परिसर को कवर नहीं कर पा रहे थे। इसी निगरानी की कमी की वजह से अमायरा जैसी मासूम बच्ची की गतिविधियों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जा सका, जो अंततः एक बड़ी त्रासदी का कारण बना।
इमारत की बनावट में तकनीकी चूक: ऊपरी मंजिलों पर सुरक्षा मानकों और रेलिंग की अनदेखी
बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्कूल की फिजिकल सुरक्षा व्यवस्था (Safety Infrastructure) पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच में पाया गया कि स्कूल की ऊपरी मंजिलों पर सुरक्षा के लिए लगाए गए ‘सेफ्टी नेट’ (सुरक्षा जाल) और रेलिंग पूरी तरह से अपर्याप्त थे। नियमानुसार, बहुमंजिला स्कूलों में रेलिंग की ऊंचाई और मजबूती ऐसी होनी चाहिए जिससे कोई भी बच्चा अनजाने में या जानबूझकर नीचे न गिर सके। इस मामले में सेफ्टी ऑडिट के दौरान स्कूल प्रशासन इन मानकों को पूरा करने में विफल रहा, जिसके चलते सीबीएसई ने इसे बच्चों की जान के लिए एक बड़ा खतरा माना।
ध्वस्त काउंसलिंग सिस्टम: छात्रों की मानसिक सेहत और तनाव को समझने में नाकाम रहा स्कूल
सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण बिंदु स्कूल का मेंटल हेल्थ काउंसलिंग सिस्टम रहा। आधुनिक शिक्षा पद्धति में हर स्कूल के पास एक सक्रिय और संवेदनशील काउंसलिंग सेल होना चाहिए, जो छात्रों के व्यवहार में आ रहे बदलावों और मानसिक तनाव को पहचान सके। अमायरा के मामले के बाद यह सामने आया कि स्कूल का काउंसलिंग तंत्र केवल कागजों तक सीमित था। स्कूल प्रशासन छात्रों की मानसिक स्थिति को समझने या उन्हें जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने में पूरी तरह विफल रहा। इसी ‘इमोशनल सपोर्ट’ की कमी को बोर्ड ने एक बड़ी संस्थागत विफलता माना है।
पीड़ित परिवार ने जताया आभार, पहली से आठवीं तक की कक्षाओं पर अब राजस्थान सरकार लेगी फैसला
अमायरा के परिजनों ने सीबीएसई की इस कड़ी कार्रवाई का स्वागत किया है और बोर्ड का आभार जताया है। हालांकि, परिजनों ने एक गंभीर सवाल भी उठाया है। उनका कहना है कि पहली से आठवीं तक की मान्यता राजस्थान शिक्षा विभाग के अधीन आती है। जब स्कूल बड़े बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं पाया गया है, तो छोटे बच्चों को वहां रखना उनके जीवन के साथ खिलवाड़ है। अब सबकी निगाहें राजस्थान सरकार और शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि क्या वे भी सीबीएसई की तरह स्कूल पर ताला लगाने का साहस दिखाएंगे या छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई वैकल्पिक रास्ता निकालेंगे।