तीन चरणों में होगा आयोजन और 12 विधाओं में दिखेगी आदिम संस्कृति की झलक, मार्च 2026 तक लाल आतंक के खात्मे का संकल्प
बस्तर (ए) । : छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ‘बस्तर पंडुम 2026’ का शंखनाद हो चुका है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी का आशीर्वाद लेकर मंदिर प्रांगण में इस भव्य उत्सव के आधिकारिक लोगो और थीम गीत का विमोचन किया। यह आयोजन बस्तर की लोककला, परंपराओं और विरासत के संरक्षण का एक जीवंत मंच बनने जा रहा है, जिसे पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कहीं अधिक व्यापक और आकर्षक रूप दिया गया है।
बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और मुख्यमंत्री का संबोधन
विमोचन के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तरवासियों को नए साल की बधाई देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक साधारण उत्सव नहीं है, बल्कि यह बस्तर की आत्मा और गौरव को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान यहाँ की आदिवासी परंपराओं, नृत्य, शिल्प और व्यंजनों में निहित है। उन्होंने घोषणा की कि पिछले वर्ष की सफलता के बाद इस बार केंद्र सरकार के मंत्रियों सहित भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि बस्तर की धरोहर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके। सीएम ने विश्वास जताया कि बस्तर अब संघर्ष की जगह अपनी रचनात्मकता और उत्सवों के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाएगा।

आयोजन के तीन चरण और नई विधाओं का समावेश
इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतियोगिताओं को और भी चुनौतीपूर्ण और विविधतापूर्ण बनाया गया है। सरकार ने इस बार प्रतिस्पर्धा की विधाओं को सात से बढ़ाकर बारह कर दिया है, जिसमें जनजातीय नृत्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, पूजा-पद्धति, पारंपरिक चित्रकला और वन-औषधि जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। पूरा आयोजन तीन मुख्य चरणों में संपन्न होगा, जिसकी शुरुआत 10 जनवरी से जनपद स्तर पर होगी, इसके बाद जिला स्तर पर कार्यक्रम होंगे और अंत में 5 फरवरी तक संभाग स्तर पर एक भव्य समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों से लेकर नगर निगमों तक के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर मिलेगा।
शांति स्थापना और नक्सलवाद की समाप्ति का बड़ा संकल्प
बस्तर पंडुम के इस मंच से सुरक्षा और शांति को लेकर भी एक बड़ा संदेश दिया गया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पंडुम का अर्थ पर्व बताते हुए कहा कि बस्तर की खुशियों को बढ़ाने के लिए माता के आशीर्वाद से यह शुरुआत की गई है। उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास अब निर्णायक मोड़ पर हैं और मार्च 2026 तक क्षेत्र से लाल आतंक का पूरी तरह सफाया हो जाएगा। सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे बस्तर में शांति लौटेगी, यहाँ का पर्यटन और संस्कृति विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।
नामांकन प्रक्रिया और वैश्विक भागीदारी की योजना
कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इस बार सरकार ने आधुनिक और पारंपरिक दोनों तरीकों को अपनाया है। प्रतिभागियों का नामांकन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जाएगा ताकि सुदूर वनांचलों के कलाकार भी आसानी से जुड़ सकें। इस बार विशेष रूप से बस्तर मूल के उन अधिकारियों, चिकित्सकों और इंजीनियरों को भी आमंत्रित किया जा रहा है जो देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत हैं। संस्कृति विभाग को इस पूरे महाकुंभ का नोडल विभाग बनाया गया है, जो बस्तर के सात जिलों की हज़ारों ग्राम पंचायतों और नगर निकायों में इस त्रि-स्तरीय आयोजन की कमान संभालेगा।