सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ते ही डूबे सरकारी कंपनियों के 13,740 करोड़, आम निवेशकों को भी लगा 7000 करोड़ का फटका
मुंबई ((ए)। : साल 2026 के शुरुआती दो कारोबारी दिनों में ही भारतीय शेयर बाजार से एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है। केंद्र सरकार द्वारा सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) लगाने के फैसले के बाद दिग्गज कंपनी ITC के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई। इस गिरावट का सबसे बड़ा और सीधा असर देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) पर पड़ा है। सिर्फ दो दिनों के भीतर LIC के निवेश की वैल्यू 11,468 करोड़ रुपये घट गई है, जिससे निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच हड़कंप मच गया है।
LIC और सरकारी बीमा कंपनियों के पोर्टफोलियो को तगड़ा झटका
ITC के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के मुताबिक, कंपनी में LIC की 15.86 परसेंट की बड़ी हिस्सेदारी है। 31 दिसंबर को LIC के इस निवेश की कुल वैल्यू 80,028 करोड़ रुपये थी, जो 2 जनवरी को शेयर गिरने के बाद घटकर मात्र 68,560 करोड़ रुपये रह गई है। LIC के अलावा जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (GIC) और द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को भी भारी घाटा हुआ है। इन तीनों सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों के पोर्टफोलियो से महज दो दिनों में कुल 13,740 करोड़ रुपये साफ हो गए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक ‘कागजी नुकसान’ (Notional Loss) है, जो तब तक वास्तविक नहीं होगा जब तक कंपनियां इन शेयरों को बेचती नहीं हैं।

ITC के मार्केट कैप से 72,000 करोड़ रुपये गायब
सरकार के फैसले के बाद ITC के शेयर 2 जनवरी को 5 परसेंट तक टूटकर अपने 52-हफ्तों के सबसे निचले स्तर 345.25 रुपये पर पहुंच गए। साल 2026 के पहले दो ट्रेडिंग सेशन में ही स्टॉक 14 परसेंट से ज्यादा लुढ़क चुका है। इस भारी गिरावट के कारण कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) 72,000 करोड़ रुपये घट गया है, जो अब गिरकर लगभग 4,38,639 करोड़ रुपये रह गया है। पिछले छह महीनों में स्टॉक में 15 परसेंट से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिससे आम निवेशकों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
क्यों आई शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के सरकार के फैसले से कंपनी के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है। ITC का कोई प्रमोटर ग्रुप नहीं है और इसकी 100 परसेंट हिस्सेदारी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी सरकारी संस्थानों की है। ड्यूटी बढ़ने की खबर से निवेशकों ने मुनाफावसूली और बिकवाली शुरू कर दी, जिससे शेयर ताश के पत्तों की तरह ढह गए। फिलहाल स्टॉक का P/E रेश्यो 22.59 पर है और बाजार को उम्मीद है कि आने वाले समय में इसमें कुछ रिकवरी देखी जा सकती है।