पढ़ाई का तनाव होगा खत्म और एकाग्रता में होगा सुधार; खेल-खेल में बच्चा बनेगा ‘जीनियस’, आज ही मोबाइल में करें ये बदलाव
भिलाई : आज के डिजिटल दौर में बच्चों को स्मार्टफोन से दूर रखना लगभग नामुमकिन है। अधिकतर पेरेंट्स इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा मोबाइल पर सिर्फ गेम खेलता है या सोशल मीडिया में समय बर्बाद करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वही स्मार्टफोन आपके बच्चे की जिंदगी बदल सकता है? टेक्नोलॉजी के इस युग में कुछ ऐसे क्रांतिकारी एजुकेशनल ऐप्स मौजूद हैं, जो न केवल बच्चों की पढ़ाई को आसान बनाते हैं, बल्कि उनकी एकाग्रता, भाषा और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर करते हैं। आज की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं उन 4 ऐप्स के बारे में, जो हर बच्चे के फोन में होने ही चाहिए।

फोटोमैथ (Photomath): गणित का डर होगा छूमंतर
गणित (Maths) एक ऐसा विषय है जिससे अधिकतर बच्चे कतराते हैं। ट्रिगोनोमेट्री हो या कठिन इक्वेशन्स, फोटोमैथ ऐप बच्चों के लिए एक निजी ट्यूटर की तरह काम करता है। बस सवाल की फोटो खींचनी है और यह ऐप न केवल उसका जवाब देता है, बल्कि उसे स्टेप-बाय-स्टेप हल करना भी सिखाता है। इससे बच्चों के बेसिक कॉन्सेप्ट्स क्लियर होते हैं और होमवर्क का बोझ कम होता है।
डुओलिंगो (Duolingo): खेल-खेल में सीखें 30 से ज्यादा भाषाएं
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा इंग्लिश, फ्रेंच या स्पैनिश जैसी नई भाषाएं सीखे, तो डुओलिंगो से बेहतर कुछ नहीं। यह ऐप भाषा सीखने को एक मजेदार गेम बना देता है। चित्रों के मिलान और छोटे-छोटे लेवल्स के जरिए बच्चे अपनी शब्दावली (Vocabulary) और व्याकरण (Grammar) को बेहद मजबूत बना लेते हैं।

हेडस्पेस (Headspace): मानसिक शांति और एकाग्रता का मंत्र
आजकल बच्चों पर अच्छे मार्क्स लाने और कॉम्पिटिशन का भारी दबाव है। इस तनाव को कम करने के लिए हेडस्पेस ऐप एक वरदान है। इसमें छोटे-छोटे ऑडियो सेशन्स होते हैं जो बच्चों को ध्यान (Meditation) करना और शांत रहना सिखाते हैं। परीक्षा के दिनों में यह ऐप बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में बेहद मददगार साबित होता है।
हेबिटिका (Habitica): जिम्मेदारी को बनाएगा रोमांचक गेम
अक्सर बच्चे होमवर्क या घर के छोटे काम करने में आनाकानी करते हैं। हेबिटिका ऐप इसे एक रोमांचक खेल में बदल देता है। इस ऐप में बच्चे अपना एक ‘डिजिटल अवतार’ बनाते हैं। जब बच्चा अपना असली होमवर्क या घर की सफाई जैसे काम पूरे करता है, तो उसके डिजिटल अवतार को गेम में रिवार्ड्स और नई पावर्स मिलती हैं। इससे बच्चों में जिम्मेदारी निभाने की आदत खेल-खेल में विकसित हो जाती है।
शिक्षाविदों का मानना है कि स्मार्टफोन को बच्चों से छीनने के बजाय, उन्हें इसके रचनात्मक उपयोग के लिए प्रेरित करना चाहिए। ये ऐप्स बच्चों को न केवल अनुशासित बनाते हैं बल्कि उनके भीतर सीखने की ललक (Curiosity) भी पैदा करते हैं। एक जागरूक माता-पिता होने के नाते, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिजिटल दुनिया आपके बच्चे के विकास में बाधा नहीं, बल्कि एक सीढ़ी बने।