रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धि: जागरूक पेरेंट्स के मामले में छत्तीसगढ़ ने सबको पछाड़ा; टॉप-4 राज्यों में शामिल होकर रचा नया इतिहास
रायपुर (ए) : राजधानी रायपुर से एक बड़ी गौरवशाली खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खास पहल ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ में छत्तीसगढ़ ने एक ऐसी लंबी छलांग लगाई है कि पूरा देश देखता रह गया है। इस राष्ट्रीय अभियान में छत्तीसगढ़ ने अभिभावकों की भागीदारी के मामले में पूरे भारत में पहला स्थान हासिल किया है। यह पहली बार है जब राज्य के माता-पिता ने बच्चों के परीक्षा तनाव को कम करने के लिए इतनी बड़ी संख्या में रुचि दिखाई है। वहीं कुल पंजीकरण के मामले में भी छत्तीसगढ़ ने देश के बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए टॉप-4 में अपनी जगह पक्की कर ली है।
आंकड़ों में दर्ज हुई छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक सफलता
सरकारी विभाग से मिली ताजा जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ से अब तक कुल 25.16 लाख से अधिक लोगों ने इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए अपना पंजीकरण कराया है। इन आंकड़ों ने राष्ट्रीय स्तर पर सबको चौंका दिया है क्योंकि इसमें 22.75 लाख छात्रों के साथ-साथ करीब 1.55 लाख शिक्षकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। सबसे खास बात यह है कि 81,533 अभिभावकों ने इसमें हिस्सा लेकर छत्तीसगढ़ को देश में शीर्ष पर पहुंचा दिया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि जिस रफ्तार से रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं, 11 जनवरी तक छत्तीसगढ़ 30 लाख के बड़े आंकड़े को भी आसानी से पार कर लेगा।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ और बलौदाबाजार ने पेश की मिसाल
राज्य की इस बड़ी सफलता के पीछे जिला स्तर पर किए गए जमीनी प्रयास सबसे बड़ी वजह रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक बलौदाबाजार जिले से सबसे ज्यादा 14,658 अभिभावकों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। वहीं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में आयोजित किए गए ‘परीक्षा पे चर्चा मेले’ ने तो एक नया रिकॉर्ड ही बना दिया है। इस जिले में जहां रोजाना औसत 1,500 रजिस्ट्रेशन हो रहे थे, वहीं मेले के आयोजन के बाद एक ही दिन में 10,000 से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण कराया। ग्रामीण इलाकों और शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों पर मौके पर ही रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी गई जिससे यह अभियान एक सरकारी कार्यक्रम के बजाय जन आंदोलन में बदल गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी प्रदेशवासियों को बधाई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस शानदार उपलब्धि का पूरा श्रेय राज्य के विद्यार्थियों, कर्मठ शिक्षकों और जागरूक अभिभावकों को दिया है। मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश कि “परीक्षाएं तनाव नहीं, बल्कि उत्सव होनी चाहिए”, इसे छत्तीसगढ़ की जनता ने पूरी तरह से आत्मसात कर लिया है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि अभिभावकों की इतनी बड़ी भागीदारी से बच्चों का मनोबल बढ़ेगा और वे बोर्ड परीक्षाओं में बिना किसी मानसिक दबाव के अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकेंगे। यह सफलता राज्य की शिक्षा व्यवस्था और जागरूकता की नई तस्वीर पेश करती है।