हार्ट और नसों पर भारी पड़ रही है जनवरी की ठंड; बिना दवा के शरीर को अंदर से गर्म रखने और खून को पतला करने का सबसे आसान तरीक
भिलाई। छत्तीसगढ़ सहित पूरे उत्तर भारत में पारा गिरते ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं चरम पर हैं। क्या आपको भी सुबह उठते ही हाथों-पैरों में झनझनाहट महसूस होती है? या थोड़ा सा चलने पर सांस फूलने लगती है? अगर हाँ, तो इसे हल्के में न लें। डॉक्टरों का कहना है कि 5 डिग्री से कम तापमान होने पर हमारा खून शहद की तरह गाढ़ा होने लगता है, जिससे दिल को उसे पंप करने में दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। आज की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे आप अपनी दिनचर्या में छोटे बदलाव करके सर्दियों के इन खतरों से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
सुबह का ‘गोल्डन रूल’: उठते ही न करें ये गलती
सर्दियों में सबसे ज्यादा हार्ट अटैक सुबह 4 बजे से 8 बजे के बीच आते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है अचानक बिस्तर छोड़ना और ठंडे वातावरण के संपर्क में आना। विशेषज्ञों की सलाह है कि सोकर उठने के बाद कम से कम 2 मिनट बिस्तर पर ही बैठें और शरीर को वातावरण के अनुकूल होने दें। इसके तुरंत बाद एक गिलास गुनगुना पानी पिएं। यह साधारण सी आदत आपके गाढ़े हो चुके खून को पतला करने में मदद करती है और नसों में अचानक आने वाले खिंचाव (Spasm) को रोकती है।
डाइट का नया मंत्र: सर्दियों में ‘कच्चा’ नहीं ‘पका’ हुआ खाएं
ठंड के मौसम में कच्ची सलाद या ठंडी चीजों का सेवन पाचन तंत्र के साथ-साथ ब्लड सर्कुलेशन को भी धीमा कर देता है। इसकी जगह अपनी डाइट में ‘हर्बल मसालों’ को शामिल करें। काली मिर्च, अदरक और दालचीनी का पानी नसों की प्राकृतिक सफाई करता है। शोध बताते हैं कि जो लोग सर्दियों में सोंठ (सूखी अदरक) का सीमित सेवन करते हैं, उनकी नसों में ब्लॉकेज की संभावना 30% तक कम हो जाती है। यह आपके शरीर के ‘थर्मोस्टेट’ को मैनेज करता है जिससे आपको अंदरूनी ठंड कम लगती है।
शाम की एक्सरसाइज का बदलें समय और तरीका
अक्सर लोग फिट रहने के लिए कड़ाके की ठंड में सुबह-सुबह पार्क निकल जाते हैं, जो इस मौसम में खतरनाक हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, जब तक धूप न खिले, तब तक भारी वर्कआउट से बचें। शाम के समय घर के अंदर ही योगाभ्यास या हल्की स्ट्रेचिंग करें। शरीर को गर्म रखने के लिए ऊनी कपड़ों की एक मोटी लेयर के बजाय पतले कपड़ों की 2-3 लेयर पहनें। यह परतों के बीच हवा को रोककर शरीर की गर्मी को बाहर जाने से रोकता है और ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने में मदद करता है।
डिजिटल दौर में हम अक्सर अपनी सेहत की छोटी चेतावनियों को नजरअंदाज कर देते हैं। कड़ाके की यह ठंड सिर्फ बाहर नहीं, आपके शरीर के अंदर भी सिस्टम को प्रभावित कर रही है। इन छोटे बदलावों को अपनाकर आप न केवल फिट रहेंगे, बल्कि आने वाले गंभीर संकटों को भी टाल सकेंगे। खुद को हाइड्रेटेड रखें और याद रखें कि आपका स्वास्थ्य ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है।