तोकापाल के खंडियापाल में दहशत का माहौल: सीतानदी-उदंती से पहुंचा है वयस्क बाघ; ग्रामीणों को जंगल न जाने की सख्त चेतावनी!
बस्तर (ए): छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। जगदलपुर संभाग मुख्यालय के नजदीक तोकापाल ब्लॉक के खंडियापाल इलाके में बाघ के पंजों के निशान देखे गए हैं। वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि कर दी है कि इलाके में एक वयस्क और पूरी तरह स्वस्थ बाघ विचरण कर रहा है। दशकों पहले बस्तर बाघों का गढ़ माना जाता था और अब एक बार फिर रिहायशी इलाकों से लगे जंगलों में बाघ की मौजूदगी ने प्रशासन और ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है।
सीतानदी-उदंती से कोंडागांव के रास्ते बस्तर पहुंचा ‘टाइगर’
वन विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक, यह बाघ छत्तीसगढ़ के वर्तमान 35 टाइगरों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बाघ सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व से निकलकर कोंडागांव के रास्ते होता हुआ बस्तर जिले की सीमा में दाखिल हुआ है। पंजों के निशान मिलने के बाद वन विभाग ने विशेष टीमों का गठन कर बाघ की लोकेशन और उसके रूट पर नजर रखनी शुरू कर दी है। विभाग की प्राथमिकता बाघ को सुरक्षित रास्ता देना और इंसानी बस्तियों से उसे दूर रखना है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को टाला जा सके।
गांवों में मुनादी और ग्रामीणों को सावधानी की सलाह
बाघ की आहट मिलने के बाद वन विभाग की टीम खंडियापाल और आसपास के गांवों में लगातार तैनात है। विभाग द्वारा ग्रामीण इलाकों में बाकायदा मुनादी करवाई जा रही है और लोगों को सचेत रहने के निर्देश दिए गए हैं। खासकर घने जंगलों और उन रास्तों पर जाने से पूरी तरह मना कर दिया गया है जहां बाघ के पैरों के निशान मिले हैं। बस्तर के मुख्य वन संरक्षक आलोक तिवारी ने जनता से अपील की है कि वे पैनिक न हों, लेकिन पूरी सावधानी बरतें। विभाग का कहना है कि बाघ के विचरण क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप कम होने से वह खुद ही सुरक्षित कॉरिडोर की ओर बढ़ जाएगा।
तस्करी के खतरे और सुरक्षा की बड़ी चुनौती
बस्तर में बाघ की मौजूदगी जितनी खुशी की बात है, उतनी ही बड़ी चिंता उनकी सुरक्षा को लेकर भी है। पिछले कुछ वर्षों में कांकेर और आसपास के इलाकों में बाघ की खाल की तस्करी के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसे देखते हुए मुख्य वन संरक्षक ने स्पष्ट किया है कि तोकापाल ब्लॉक और इंद्रावती टाइगर रिजर्व में मौजूद बाघों की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है। वर्तमान में इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 6 बाघों की पुष्टि हुई है। प्रशासन अब इन दुर्लभ वन्यजीवों को तस्करों से बचाने और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठा रहा है।