5 साल के रिकॉर्ड खंगाल रहे अधिकारी, पूर्व साडा अध्यक्ष के परिवार से जुड़ी बताई जा रही कंपनी
भिलाई (ए) : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में जीएसटी (GST) विभाग की बड़ी कार्रवाई से औद्योगिक जगत में हड़कंप मचा हुआ है। भिलाई के लाइट इंडस्ट्रियल एरिया स्थित ‘हरिओम इन्गोट्स एंड पावर लिमिटेड’ पर विभाग की रेड मंगलवार को दूसरे दिन भी देर रात तक जारी रही। भारी संख्या में पहुंचे अधिकारी कंपनी के वित्तीय लेन-देन और व्यापारिक दस्तावेजों की सूक्ष्मता से जांच कर रहे हैं। टैक्स चोरी की पुख्ता सूचना के आधार पर शुरू हुई इस दबिश ने क्षेत्र के अन्य उद्योगपतियों की भी चिंता बढ़ा दी है।
पांच वर्षों के वित्तीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल
जीएसटी विभाग की टीम इस कार्रवाई के दौरान कंपनी के पिछले पांच सालों के पूरे कच्चे-चिट्ठे को खंगालने में जुटी है। अधिकारियों द्वारा मुख्य रूप से कंपनी के पुराने स्टॉक, उत्पादन की क्षमता और इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट से जुड़े ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है। विभाग को संदेह है कि प्रोडक्शन और सेल के आंकड़ों में हेरफेर कर बड़े पैमाने पर जीएसटी की चोरी की गई है। रेड के दौरान डिजिटल एविडेंस और हार्ड ड्राइव्स को भी कब्जे में लेकर उनके डेटा का मिलान फिजिकल स्टॉक से किया जा रहा है, ताकि वास्तविक अंतर का पता लगाया जा सके।
कंपनी के मालिकाना हक और रसूखदारों से कनेक्शन
हरिओम इन्गोट्स एंड पावर लिमिटेड के प्रशासनिक ढांचे और इसके मालिकों को लेकर भी बड़ी जानकारी सामने आई है। रिकॉर्ड के मुताबिक इस कंपनी में संदीप अग्रवाल, संतोष अग्रवाल और भगवानदास अग्रवाल बतौर डायरेक्टर शामिल हैं। सूत्रों के हवाले से यह खबर भी निकलकर आ रही है कि इस कंपनी का सीधा संबंध पूर्व साडा (SADA) अध्यक्ष सत्यनारायण अग्रवाल के परिवार से है। रसूखदार परिवार से जुड़े होने के कारण इस छापेमारी को बेहद गोपनीय रखा गया था और कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र में पसरा सन्नाटा और आगामी कार्रवाई
भिलाई के लाइट इंडस्ट्रियल एरिया में दूसरे दिन भी कार्रवाई जारी रहने से आसपास की फैक्ट्रियों और व्यापारिक संस्थानों में सन्नाटा पसरा हुआ है। जीएसटी विभाग के सूत्रों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच में काफी वक्त लग सकता है क्योंकि मामला करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी से जुड़ा होने की संभावना है। फिलहाल अधिकारी कुछ भी आधिकारिक बयान देने से बच रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि जांच पूरी होने के बाद कंपनी पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की गाज गिर सकती है।