रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में कर्मचारियों का हल्लाबोल, 2 और 3 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल से ठप हो सकता है बैंकिंग कामकाज
छत्तीसगढ़ (ए) : में सरकारी इंडियन ओवरसीज बैंक के कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले कई महीनों से बैंक की शाखाओं में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिसने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। ऑल इंडिया ओवरसीज बैंक एम्प्लॉइज यूनियन के नेतृत्व में कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही नियुक्तियां नहीं की गईं, तो बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी जाएंगी। बैंक की शाखाओं में क्लर्क से लेकर गार्ड, स्वीपर और मैसेंजर तक के पद खाली पड़े हैं, जिससे सामान्य बैंकिंग संचालन करना अब कर्मचारियों के लिए लगभग असंभव होता जा रहा है।
सिर्फ 52 शाखाओं में ही क्लर्कों के दर्जनों पद खाली
यूनियन द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार स्टाफ की कमी की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। बताया गया है कि केवल 52 शाखाओं के भीतर ही 49 क्लर्कों की भारी कमी है, जबकि पूरे प्रदेश की कई शाखाओं में तो स्वीपर तक उपलब्ध नहीं हैं। स्टाफ की इस गंभीर कमी का असर न केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता पर पड़ रहा है, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी अपनी बुनियादी बैंकिंग सेवाओं के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों जैसे रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में शुक्रवार को कर्मचारियों ने धरना देकर अपनी इसी पीड़ा को प्रबंधन के सामने रखा है।
फरवरी की शुरुआत में दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की घोषणा
अपनी मांगों को अनसुना होता देख यूनियन ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और प्रबंधन को हड़ताल का औपचारिक नोटिस थमा दिया है। यूनियन के पदाधिकारियों ने घोषणा की है कि आगामी 2 और 3 फरवरी को देशभर में दो दिवसीय काम रोको आंदोलन किया जाएगा। इस हड़ताल की सूचना से बैंक के ग्राहकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है, क्योंकि महीने की शुरुआत में होने वाली इस हड़ताल से वित्तीय लेन-देन पर गहरा असर पड़ सकता है। सहायक महासचिव योगेश कुमार ने बताया कि कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के माध्यम से कई बार अपनी बात रखी, लेकिन समाधान न होने के कारण अब हड़ताल ही अंतिम विकल्प बचा है।
काम के बढ़ते दबाव और खराब सेवा स्तर पर जताई चिंता
यूनियन के ईस्ट जोन के उपाध्यक्ष ने मौजूदा स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव अत्यधिक बढ़ गया है। क्लर्कों और सहायक कर्मचारियों की कमी की वजह से ग्राहकों को चेक क्लियरेंस, पासबुक अपडेट और कैश जमा करने जैसी मूलभूत सेवाओं के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। यूनियन का तर्क है कि जब तक नेटवर्क में पर्याप्त मैनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक न तो कर्मचारियों को राहत मिलेगी और न ही ग्राहकों को बेहतर सेवा मिल पाएगी। इसी संघर्ष को निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए अब कर्मचारी सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।