हेल्थ बुलेटिन: प्लास्टिक और अचार का मेल बन रहा है ‘साइलेंट किलर’, लड़के-लड़कियों में बांझपन (Infertility) का सबसे बड़ा कारण; मेडिकल रिपोर्ट ने उड़ाए होश
भारतीय रसोई में अचार स्वाद का दूसरा नाम है, लेकिन डॉक्टरों के एक नए और बड़े खुलासे ने सबको हैरान कर दिया है। अगर आप भी अपने घर का बना या बाजार से लाया अचार प्लास्टिक के डिब्बों में स्टोर करते हैं, तो यह आपकी प्रजनन क्षमता (Fertility) के लिए काल साबित हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक और अचार का मेल शरीर के भीतर एक ऐसी तबाही मचा रहा है, जिसका असर सीधा युवाओं के माता-पिता बनने के सपने पर पड़ रहा है।
प्लास्टिक और अचार का ‘केमिकल कनेक्शन’
अचार में मौजूद तेल, नमक और खटाई (एसिड) प्लास्टिक के साथ मिलकर एक खतरनाक रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं। इस प्रक्रिया में प्लास्टिक में मौजूद बिस्फेनॉल-ए (BPA) जैसे जहरीले रसायन अचार में घुल जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, जब हम यह अचार खाते हैं, तो ये केमिकल सीधे हमारे खून में पहुँच जाते हैं। यह प्रक्रिया इतनी धीमी होती है कि हमें पता भी नहीं चलता कि हम हर रोज थोड़ा-थोड़ा जहर खा रहे हैं।
बांझपन का खतरा: क्यों यह युवाओं के लिए ‘दुश्मन’ है?
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि प्लास्टिक के संपर्क में आया अचार खाने से शरीर का हार्मोनल ढांचा पूरी तरह बिगड़ जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये रसायन ‘हार्मोन इमिटेटर्स’ होते हैं, जो शरीर के असली हार्मोन्स की जगह ले लेते हैं।
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लड़कों के लिए जोखिम: डॉक्टरों का कहना है कि यह पुरुषों के मुख्य हार्मोन ‘टेस्टोस्टेरोन’ को कम कर देता है, जिससे स्पर्म काउंट और उसकी क्वालिटी खराब हो जाती है। यह सीधे तौर पर बांझपन की ओर ले जाता है।
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लड़कियों के लिए खतरा: यह महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे पीसीओडी (PCOD), पीरियड्स की अनियमितता और गर्भधारण में गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं।
पुराने समय में अचार हमेशा कांच की बरनियों या चीनी मिट्टी के बर्तनों में रखा जाता था। इसका कारण यह था कि ये सामग्रियां अचार के एसिड के साथ कोई रिएक्शन नहीं करतीं। डॉक्टरों की सलाह है कि यदि आप अपनी और अपने परिवार की सेहत को लेकर गंभीर हैं, तो प्लास्टिक के डिब्बों का मोह छोड़ें और अचार को तुरंत कांच के जार या सिरेमिक के बर्तनों में शिफ्ट करें।
डॉक्टर्स अलर्ट: प्लास्टिक के डिब्बे में रखा अचार केवल पाचन ही खराब नहीं करता, बल्कि शरीर के ‘रिप्रोडक्टिव सिस्टम’ को अंदर से खोखला कर देता है।