कर्नाटक में बैलट पेपर से स्थानीय निकाय चुनाव के फैसले पर पार्टी दो खेमों में; नेतृत्व पारदर्शिता का दावा, कुछ नेता बोले—‘पीछे की ओर कदम’
चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाने वाली Indian National Congress अब अपने ही फैसले से घिरती नजर आ रही है। कर्नाटक में स्थानीय निकाय चुनाव बैलट पेपर से कराने के निर्णय ने पार्टी के भीतर मतभेद को सार्वजनिक कर दिया है। एक ओर राज्य सरकार इसे पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बता रही है, तो दूसरी ओर पार्टी के कई नेता इसे तकनीकी प्रगति से पीछे लौटने जैसा बता रहे हैं।
नई दिल्ली। देशभर में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर सवाल उठाने वाली कांग्रेस के भीतर अब मतदान प्रणाली को लेकर दो राय सामने आ गई हैं। कर्नाटक में Siddaramaiah सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव बैलट पेपर से कराने का फैसला किया है। सरकार का तर्क है कि इससे मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा।
हालांकि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि तकनीक के इस दौर में बैलट पेपर की ओर लौटना व्यावहारिक नहीं है। उनका कहना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया धीमी होगी और विवाद की संभावनाएं बढ़ेंगी।
लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi पहले ही चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठा चुके हैं। ‘वोट चोरी’ अभियान के जरिए पार्टी चुनावी प्रक्रिया में सुधार की मांग करती रही है। लेकिन कर्नाटक सरकार के फैसले ने कांग्रेस के भीतर ही रणनीतिक मतभेद उजागर कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा अब केवल तकनीकी बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी की अंदरूनी एकजुटता पर भी असर डाल सकता है। विपक्षी दलों ने भी इस फैसले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है, जिससे आगामी चुनावों में यह बहस और तेज होने की संभावना है।