महंगी मिसाइलों के साथ किफायती ‘मिनी मॉडल’ का बड़ा भंडार बनाने की रणनीति; स्वदेशी उत्पादन पर जोर, लेजर आधारित रक्षा प्रणाली भी होगी शामिल
रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्धों ने आधुनिक युद्ध का नया समीकरण तय कर दिया है—अब लड़ाई सिर्फ ताकत की नहीं, बल्कि टिकाऊ संसाधनों की भी है। इसी बदलते परिदृश्य में भारत ने अपनी रक्षा रणनीति को नया रूप देते हुए सस्ती, सटीक और बड़े पैमाने पर उपलब्ध हथियारों पर फोकस बढ़ा दिया है। ‘बेबी ब्रह्मोस’ के नाम से चर्चित उन्नत पिनाका सिस्टम इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
नई दिल्ली (ए)। भविष्य के युद्ध लंबे और संसाधन-आधारित होंगे—यह आकलन अब भारत की सैन्य नीति का आधार बनता दिख रहा है। सेना अब केवल अत्याधुनिक और महंगी मिसाइलों पर निर्भर रहने के बजाय उनके किफायती, छोटे लेकिन प्रभावी संस्करणों का बड़ा भंडार तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
हाल ही में मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम Pinaka के हवाई संस्करण के परीक्षण को इसी बदलाव की कड़ी माना जा रहा है। इसकी सटीक मारक क्षमता और तेज प्रहार की वजह से इसे अनौपचारिक तौर पर ‘बेबी ब्रह्मोस’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह कम लागत में उच्च प्रभाव देने की क्षमता रखता है।
सेना प्रमुख Upendra Dwivedi ने हाल ही में स्पष्ट किया कि हाई डेंसिटी वार यानी लंबी और तीव्र लड़ाई की स्थिति में वही देश टिक पाएगा जिसके पास बड़ी संख्या में किफायती और उन्नत हथियार उपलब्ध हों। उनका कहना था कि रणनीतिक संतुलन अब केवल गुणवत्ता से नहीं, बल्कि मात्रा और आत्मनिर्भरता से भी तय होगा।
संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में इस दृष्टिकोण का समर्थन किया है। समिति ने सुझाव दिया है कि देश को ऐसे हथियारों का उत्पादन बढ़ाना चाहिए, जो कम लागत में और देश के भीतर ही बड़े पैमाने पर तैयार किए जा सकें। बजट में स्वदेशी रक्षा खरीद के लिए अलग से प्रावधान इसी नीति का हिस्सा है, ताकि आपात स्थिति में विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम रहे।
हालिया वैश्विक संघर्षों ने इस सोच को मजबूती दी है। Israel-हमास युद्ध में हजारों सस्ते रॉकेटों को रोकने के लिए महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ा। वहीं Ukraine में कम लागत वाले ड्रोन ने करोड़ों के टैंकों और सैन्य संसाधनों को निशाना बनाकर युद्ध की तस्वीर बदल दी। इन उदाहरणों ने स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध केवल अत्याधुनिक हथियारों से नहीं, बल्कि बड़े और टिकाऊ भंडार से जीते जाते हैं।
इसी क्रम में भारत लेजर आधारित रक्षा प्रणाली Iron Beam हासिल करने की दिशा में भी बढ़ रहा है। यह प्रणाली बेहद कम लागत वाली ऊर्जा का उपयोग कर हवा में ही रॉकेट और ड्रोन को निष्क्रिय करने में सक्षम मानी जाती है।
रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी भारत की स्थिति मजबूत हो रही है। Armenia के बाद अब France ने भी पिनाका सिस्टम में रुचि दिखाई है। इससे भारत के छोटे और मध्यम श्रेणी के हथियारों के वैश्विक हब बनने की दिशा में नई संभावनाएं खुल रही हैं।
स्पष्ट है कि भारत की नई रक्षा रणनीति केवल ‘सुपर वेपन’ पर नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट और सस्टेनेबल वेपन’ के फार्मूले पर आधारित है—जहां कम कीमत में ज्यादा मारक क्षमता और आत्मनिर्भरता भविष्य की सुरक्षा का आधार बनेगी।