रिकॉर्ड अधूरा होने से मालिकों की पहचान मुश्किल; न रिन्यूअल, न इंश्योरेंस, कई मामलों में अपराध में भी इस्तेमाल
प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन सड़कों पर चल रहे हैं जिनकी निर्धारित 15 वर्ष की वैधता समाप्त हो चुकी है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब सात लाख कारें और दोपहिया वाहन बिना रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के ही उपयोग में हैं, जबकि इनके मालिकों की जानकारी भी विभागीय रिकॉर्ड में पूरी तरह उपलब्ध नहीं है।
रायपुर। प्रदेश में बड़ी संख्या में पुराने वाहन बिना वैध रजिस्ट्रेशन के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग के अनुमान के मुताबिक करीब सात लाख ऐसे वाहन हैं जिनकी 15 साल की वैधता समाप्त हो चुकी है, लेकिन उनके मालिकों ने न तो रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण कराया है और न ही कई मामलों में बीमा व हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाई गई है।
अधिकांश वाहन वर्ष 2005 से 2010 के बीच खरीदे गए थे। उस समय वाहनों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन नहीं होता था, जिसके कारण विभाग के रिकॉर्ड में कई वाहन मालिकों के पते और संपर्क विवरण अधूरे हैं। यही वजह है कि ट्रैफिक नियम उल्लंघन की स्थिति में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी वाहन मालिकों की पहचान कर पाना मुश्किल हो रहा है।
आठ लाख वाहनों की बिक्री, सिर्फ एक लाख का नवीनीकरण
जानकारी के अनुसार 2005 से 2010 के बीच प्रदेश में लगभग आठ लाख वाहन खरीदे गए थे। नियमों के मुताबिक 15 वर्ष पूरे होने के बाद ऐसे वाहनों का या तो नया रजिस्ट्रेशन कराया जाना चाहिए या उन्हें कबाड़ घोषित किया जाना चाहिए।
लेकिन अब तक केवल लगभग एक लाख वाहनों का ही नवीनीकरण कराया गया है। यानी शेष करीब सात लाख वाहन अब भी बिना वैध रजिस्ट्रेशन के सड़कों पर चल रहे हैं।
कबाड़ घोषित करने में भी लापरवाही
पिछले पांच वर्षों में पुराने वाहनों को स्क्रैप घोषित करने की प्रक्रिया भी बेहद धीमी रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस अवधि में केवल 2200 वाहनों को ही कबाड़ घोषित किया गया है, जबकि बड़ी संख्या में वाहन अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की स्क्रैप नीति के तहत पुराने वाहन कबाड़ घोषित करने पर नए वाहन की खरीद में कुछ रियायत भी मिलती है, लेकिन जागरूकता की कमी और प्रक्रिया की जटिलता के कारण लोग इसका लाभ नहीं उठा रहे हैं।
अपराध में भी हो रहा इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार कुछ मामलों में पुराने और बिना वैध रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों का उपयोग अपराध में भी किया जा रहा है। ऐसे वाहनों के मालिकों की जानकारी स्पष्ट न होने के कारण आरोपियों तक पहुंचने में भी कठिनाई आती है। हाल ही में चाकूबाजी के एक मामले में आरोपी जिस बाइक से भागा था, उसका रजिस्ट्रेशन दो वर्ष पहले ही समाप्त हो चुका था।
समय सीमा तय कर होगी कार्रवाई
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिन वाहनों का रजिस्ट्रेशन समाप्त हो चुका है, उनके नवीनीकरण के लिए समय सीमा तय की जाएगी। इसके बाद निर्धारित अवधि में प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले वाहनों का रिकॉर्ड निरस्त कर दिया जाएगा और सड़कों पर मिलने पर ऐसे वाहनों को जब्त कर सीधे स्क्रैप में भेजा जा सकेगा।