5 हजार किमी की यात्रा 237 विधानसभा सीटों तक पहुंची, साउथ बंगाल में बदलाव की मांग और राजनीतिक मुकाबला तेज
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने पूरे राज्य में ‘परिवर्तन यात्रा’ निकालकर सत्ता परिवर्तन का माहौल बनाने की कोशिश तेज कर दी है। करीब 5 हजार किलोमीटर लंबी यह यात्रा राज्य की 294 में से 237 विधानसभा सीटों तक पहुंची, जबकि इसका समापन कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में नरेंद्र मोदी की सभा के साथ हुआ।
कोलकाता (ए)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य के साथ पूरे राज्य में लगभग 5 हजार किलोमीटर लंबी ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाली। 1 और 2 मार्च से राज्य के अलग-अलग हिस्सों से शुरू हुई यह यात्रा 294 में से 237 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंची और 14 मार्च को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा के साथ इसका समापन हुआ।
यात्रा के दौरान पार्टी नेताओं ने राज्य में बदलाव का मुद्दा उठाते हुए मौजूदा सरकार पर निशाना साधा। कोलकाता की सभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राज्य में “जंगलराज का काउंटडाउन शुरू हो चुका है” और युवाओं को बंगाल के विकास का नेतृत्व करना होगा।
मीडिया ने इस यात्रा को साउथ-वेस्ट बंगाल और नॉर्थ बंगाल के कई हिस्सों में जाकर समझने की कोशिश की। यात्रा जिन क्षेत्रों से गुजरी, वहां के लोगों से बातचीत में सामने आया कि कई जगहों पर बदलाव की मांग तो है, लेकिन राजनीतिक माहौल को लेकर लोगों में खुलकर बोलने में झिझक भी दिखाई देती है।
पुरुलिया में कम भीड़, लेकिन बदलाव की चर्चा
7 मार्च को जब परिवर्तन यात्रा पुरुलिया जिले के रघुनाथपुर औद्योगिक क्षेत्र पहुंची तो रैली में अपेक्षा से कम भीड़ नजर आई। यह इलाका हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी वाला क्षेत्र है और यहां से भाजपा का विधायक भी है। इसके बावजूद रैली में आम लोगों की संख्या सीमित रही।
स्थानीय निवासी अवधेश राम ने कहा कि उन्हें सरकारी आवास योजना का लाभ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कई बार जांच के बाद भी घर नहीं मिला। उनका मानना है कि यदि राज्य में केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार हो तो गरीबों को योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से मिल सकेगा।
समर्थन है, लेकिन खुलकर बोलने से हिचक
रैली में शामिल भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई लोग पार्टी को समर्थन देते हैं, लेकिन खुलकर सामने आने से हिचकते हैं। स्थानीय स्तर पर पार्टी से जुड़ी ज्योति सिंह ने बताया कि विपक्षी दलों को कार्यक्रमों की अनुमति मिलने में भी दिक्कतें आती हैं। उनका दावा है कि यात्रा का उद्देश्य कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल बढ़ाना है ताकि लोग बिना डर के अपनी राजनीतिक राय व्यक्त कर सकें।
पार्टी का लक्ष्य 165 सीटें
यात्रा के प्रबंधन में जुटे स्थानीय कार्यकर्ताओं के अनुसार यह अभियान सिर्फ रैली नहीं बल्कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को 165 सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है और परिवर्तन यात्रा को उसी दिशा में माहौल बनाने की कोशिश माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण बंगाल में मुकाबला ज्यादा कड़ा है क्योंकि यहां कई इलाकों में तृणमूल कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में परिवर्तन यात्रा के जरिए भाजपा संगठन और मतदाताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रही है।