विधानसभा से धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित; 25 लाख तक जुर्माना, मददगार भी दायरे में, विपक्ष का वॉकआउट
छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण पर लगाम कसने के लिए सरकार ने कड़ा कानून लागू किया है। विधानसभा में पारित नए विधेयक के तहत अब दोषियों को उम्रकैद तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस नए कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों में कड़ी सजा और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार ने इसे राज्य में बल, प्रलोभन और धोखाधड़ी के जरिए होने वाले धर्मांतरण को रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
विधेयक के अनुसार, अवैध रूप से धर्मांतरण कराने के दोषियों को 7 से 10 वर्ष तक की सजा और न्यूनतम 5 लाख रुपए जुर्माना देना होगा। यदि पीड़ित महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 वर्ष तक की जा सकती है, साथ ही कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
सबसे सख्त प्रावधान सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में किया गया है, जहां दोषियों को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माना देना होगा। कानून के तहत ऐसे मामलों में सहयोग करने वाले व्यक्तियों को भी समान रूप से दोषी माना जाएगा।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि वर्ष 1968 का पुराना कानून वर्तमान परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों के लिहाज से अपर्याप्त हो चुका था। नए कानून में आधुनिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए प्रावधान जोड़े गए हैं।
विधानसभा में बिल पारित होने के दौरान सत्तापक्ष के विधायकों ने समर्थन में नारेबाजी की, जबकि विपक्ष ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए वॉकआउट किया। विपक्ष का कहना था कि इस तरह के महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी और इसके लिए न्यायपालिका व सभी दलों की राय ली जानी चाहिए थी।