निफ्टी 776 अंक फिसला, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली; एक दिन में निवेशकों के 13 लाख करोड़ डूबे
वैश्विक तनाव और घरेलू कारकों के दबाव में शेयर बाजार में गुरुवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 3% से ज्यादा की गिरावट आई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी दर्ज की गई।
मुंबई (ए)। शेयर बाजार में गुरुवार, 19 मार्च को जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते सूचकांकों में 22 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 2,497 अंकों की गिरावट के साथ 74,207 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 776 अंक टूटकर 23,002 के स्तर पर आ गया।
बाजार में गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव और महंगाई को लेकर बढ़ती आशंकाएं रहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध जैसे हालात में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतें बढ़ती हैं, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और मुनाफा घटने का खतरा पैदा होता है। इसी डर से निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों में बिकवाली की।
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर
आज के कारोबार में बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। प्रमुख बैंकिंग शेयरों में गिरावट ने बाजार को नीचे खींचने में अहम भूमिका निभाई।
HDFC बैंक में गिरावट, चेयरमैन के इस्तीफे का असर
HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे का असर भी बाजार पर पड़ा। बैंक के शेयर में 5.11% की गिरावट आई और यह 43 रुपए टूटकर 800 रुपए पर आ गया। चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में बैंक के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने कुछ ऐसे निर्णय और प्रक्रियाएं देखीं, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं।
उनके इस्तीफे के बाद रिजर्व बैंक की मंजूरी से केकी मिस्त्री को 19 मार्च 2026 से तीन महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया है। वह पहले से ही बैंक के बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे।
निवेशकों को भारी नुकसान
बाजार में आई इस तेज गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 439 लाख करोड़ रुपए से घटकर 426 लाख करोड़ रुपए रह गया। इस तरह एक ही दिन में निवेशकों को करीब 13 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।