मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की चाल पर टिकी निगाहें; निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
अंतरराष्ट्रीय तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण संकेत दे रही है। हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर सख्त बयानबाजी और वैश्विक कारकों के दबाव में शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव की आशंका जताई जा रही है।
नई दिल्ली (ए)। 23 मार्च से शुरू हो रहे कारोबारी सप्ताह में शेयर बाजार की चाल कई वैश्विक और घरेलू कारकों से प्रभावित होती नजर आएगी। खासकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से दी गई चेतावनी—कि यदि 48 घंटे के भीतर हॉर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोला गया तो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है—ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। इस बयान के बाद निवेशकों में सतर्कता और डर का माहौल देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में पांच प्रमुख कारक अहम भूमिका निभाएंगे। इनमें मिडिल ईस्ट का भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री, अमेरिकी और एशियाई बाजारों के संकेत, तथा घरेलू आर्थिक आंकड़े शामिल हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी प्रकार की तेजी भारत जैसे आयातक देशों के लिए महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है। वहीं, विदेशी निवेशकों की निकासी या निवेश का रुख भी बाजार के उतार-चढ़ाव को तेज कर सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों को इस सप्ताह सावधानी बरतते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए, क्योंकि वैश्विक घटनाक्रम के चलते बाजार में अचानक बदलाव संभव है।