सरकार का स्पष्ट निर्देश—खाने की कीमत में ही शामिल हों सभी खर्च, अलग से वसूली गैरकानूनी
‘गैस क्राइसिस चार्ज’ के नाम पर वसूली के मामले के बाद CCPA ने कड़ा रुख अपनाया
होटल और रेस्टोरेंट में खाने के बिल पर अतिरिक्त ‘LPG चार्ज’ या अन्य किसी नाम से फीस वसूलने पर अब सख्ती की गई है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं से केवल मेन्यू में तय कीमत और लागू टैक्स ही लिए जा सकते हैं, इसके अलावा कोई भी अतिरिक्त चार्ज नियमों के खिलाफ होगा।
नई दिल्ली (ए)। देशभर में होटल और रेस्टोरेंट द्वारा ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने स्पष्ट किया है कि रेस्टोरेंट अपने बिल में खाने की कीमत के अलावा केवल सरकारी टैक्स ही जोड़ सकते हैं, किसी भी तरह का अलग ‘LPG चार्ज’ या अन्य ऑपरेशनल फीस लेना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
अथॉरिटी के अनुसार, गैस की बढ़ती कीमत या अन्य खर्चों का हवाला देकर अलग से शुल्क वसूलना उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है। रेस्टोरेंट्स को अपने सभी खर्चों को पहले से ही मेन्यू में दर्शाई गई कीमत में शामिल करना होगा।
हाल ही में बेंगलुरु के एक कैफे का मामला सामने आया, जहां ग्राहक से ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ के नाम पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त राशि वसूली गई। दो मिंट लेमोनेड के ऑर्डर पर छूट देने के बाद जीएसटी के साथ अलग से यह चार्ज जोड़ा गया, जिससे बिल की कुल राशि बढ़ गई। इस घटना ने ऐसे मामलों पर सवाल खड़े किए।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई होटल और रेस्टोरेंट पहले से लागू ‘सर्विस चार्ज’ पर प्रतिबंध को दरकिनार करने के लिए नए नामों से शुल्क वसूलने की कोशिश कर रहे हैं। CCPA ने इसे गंभीरता से लेते हुए सख्त निगरानी और कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अथॉरिटी ने उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि किसी बिल में ‘LPG चार्ज’, ‘फ्यूल चार्ज’ या अन्य कोई अतिरिक्त फीस जोड़ी जाती है, तो सबसे पहले संबंधित रेस्टोरेंट से उसे हटाने की मांग करें। यदि शिकायत का समाधान नहीं होता, तो उपभोक्ता विभिन्न माध्यमों से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
ग्राहक नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल कर सकते हैं, या NCH मोबाइल ऐप और ई-जाग्रति पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, जिला कलेक्टर या CCPA के समक्ष भी मामला उठाया जा सकता है।
सरकार के इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाना और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।