ऑयल-गैस और फार्मा शेयरों में बिकवाली; RBI की बैठक और कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
मुंबई (ए)। सप्ताह की शुरुआत शेयर बाजार के लिए कमजोर रही। सोमवार, 6 अप्रैल को सेंसेक्स करीब 450 अंकों की गिरावट के साथ 73,850 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी भी 100 अंक टूटकर 22,600 पर आ गया।
बाजार में सेक्टोरल स्तर पर दबाव साफ नजर आया। ऑयल एंड गैस और फार्मा शेयरों में बिकवाली हावी रही, हालांकि सेंसेक्स के 30 में से 21 शेयरों में तेजी देखने को मिली, जिससे गिरावट सीमित रही।
एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार दबाव में रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं, जबकि हॉन्गकॉन्ग और चीन के बाजार बंद हैं।
अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में मिला-जुला रुख रहा था। डाउ जोंस में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक और S&P 500 बढ़त के साथ बंद हुए।
इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी चिंता का कारण बनी हुई है। क्रूड ऑयल करीब 0.48% बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहा है।
बाजार की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर है, जो आज से शुरू हो गई है। 8 अप्रैल को इसके फैसले सामने आएंगे। फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।
टेक्निकल दृष्टिकोण से निफ्टी अपने अहम सपोर्ट जोन के करीब पहुंच रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक 21,930 और 21,750 के स्तर मजबूत सपोर्ट माने जा रहे हैं, जबकि 23,000 से 23,500 के बीच कड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है।
सेंसेक्स के लिए 73,800–74,000 का स्तर तत्काल बाधा बना हुआ है। यदि यह 72,000 के नीचे फिसलता है, तो 71,000 तक गिरावट संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। मिडिल ईस्ट के हालात, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहते हुए मजबूत फंडामेंटल वाले लार्ज-कैप शेयरों में निवेश की सलाह दी जा रही है।