क्रॉस वेंटिलेशन और सही डिजाइन से घटेगी घर की गर्मी
छत, दीवार और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनते हैं हीट के बड़े स्रोत
फ्लैट और मकान की बनावट के अनुसार बदलता है तापमान
एक्सपर्ट्स ने बताए नेचुरल कूलिंग के आसान तरीके
गर्मी के मौसम में घर को ठंडा बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता। हर किसी के लिए एयर कंडीशनर लगाना संभव नहीं होता, लेकिन कुछ आसान और देसी उपाय अपनाकर घर को प्राकृतिक तरीके से ठंडा रखा जा सकता है।
गर्मी के बढ़ते तापमान के बीच घर के अंदर ठंडक बनाए रखना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण छत और दीवारें गर्म होकर घर के तापमान को बढ़ा देती हैं, जिससे लंबे समय तक रहना असहज हो जाता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बिना एयर कंडीशनर के भी घर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखा जा सकता है। इसके लिए घर की बनावट, वेंटिलेशन और कुछ पारंपरिक उपाय अहम भूमिका निभाते हैं।
चार्टर्ड इंजीनियर (आर्किटेक्ट) प्रमोद कुमार मौर्य के अनुसार, घर में गर्मी के मुख्य स्रोतों में खुली छत, पतली दीवारें, सीधी धूप, खराब वेंटिलेशन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। वहीं, हरियाली की कमी भी तापमान बढ़ाने में योगदान देती है।
उन्होंने बताया कि फ्लैट और स्वतंत्र मकानों में गर्मी का प्रभाव अलग-अलग होता है। टॉप फ्लोर वाले फ्लैट सबसे ज्यादा गर्म होते हैं, क्योंकि वे सीधे छत के संपर्क में रहते हैं। वहीं, मिड फ्लोर फ्लैट अपेक्षाकृत ठंडे रहते हैं। दूसरी ओर, स्वतंत्र मकानों में छत, दीवारों और खिड़कियों से हर दिशा से गर्मी प्रवेश कर सकती है।
बिल्डिंग के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी तापमान को प्रभावित करती है। कंक्रीट के घर ज्यादा गर्मी को अवशोषित करते हैं, जबकि मिट्टी और पत्थर से बने पारंपरिक घर प्राकृतिक रूप से ठंडे रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सही वेंटिलेशन और देसी उपायों को अपनाकर घर के अंदर और बाहर के तापमान में 2 से 10 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर लाया जा सकता है।
ऐसे में क्रॉस वेंटिलेशन, छत पर कूलिंग उपाय, पर्दों का उपयोग, और घर के आसपास हरियाली बढ़ाने जैसे कदम अपनाकर बिना अतिरिक्त खर्च के भी गर्मी से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।