लखनऊ स्टेडियम के बाहर क्रिकेट प्रेमियों से कर रहे थे ठगी, UPI ट्रांजैक्शन से खुला फर्जीवाड़े का राज
आईपीएल मैच के नाम पर क्रिकेट प्रेमियों से ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश की लखनऊ साइबर सेल और सुशांत गोल्फ सिटी थाना पुलिस ने दुर्ग के चार युवकों को नकली IPL टिकट बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी सोशल मीडिया से असली टिकट की तस्वीर डाउनलोड कर ChatGPT और डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर की मदद से हूबहू फर्जी टिकट तैयार करते थे।
रायपुर। आईपीएल मैच देखने पहुंचे क्रिकेट प्रशंसकों को नकली टिकट बेचकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। लखनऊ पुलिस ने दुर्ग निवासी श्रीकांत बोरकर, नूतन कुमार साहू, राजेंद्र चौधरी और विश्वजीत साहू को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में फर्जी टिकट, लैपटॉप, मोबाइल फोन, प्रिंटिंग सामग्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से असली IPL टिकटों की तस्वीर डाउनलोड करते थे और फिर CorelDRAW सॉफ्टवेयर की मदद से उनकी कॉपी तैयार करते थे। टिकट का डिजाइन, साइज और पेपर क्वालिटी को असली जैसा बनाने के लिए उन्होंने ChatGPT का भी इस्तेमाल किया।
स्टेडियम गेट पर खुली ठगी की पोल
घटना 7 मई की बताई जा रही है, जब लखनऊ के इकाना स्टेडियम में लखनऊ सुपर जायंट्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच मुकाबला खेला जा रहा था। मैच देखने पहुंचे जालौन निवासी प्रदीप सिंह को आरोपियों ने स्टेडियम के बाहर दो टिकट बेच दिए और UPI के जरिए 1000 रुपये ले लिए।
लेकिन जैसे ही टिकट एंट्री गेट पर स्कैन किए गए, वे फर्जी निकले। इसके बाद पीड़ित ने सुशांत गोल्फ सिटी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
UPI ट्रांजैक्शन से पुलिस तक पहुंचा गिरोह
शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल और पुलिस टीम सक्रिय हुई। तकनीकी जांच और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए पुलिस ने UPI ट्रांजैक्शन को ट्रेस किया और लखनऊ के दोदनखेड़ा चौराहे के पास से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
डीसीपी साउथ अमित कुमार आनंद के मुताबिक, आरोपियों ने ऑनलाइन पेमेंट लेने की वजह से अपनी लोकेशन और पहचान छिपाने में गलती कर दी, जिसके चलते पुलिस उन तक पहुंच गई।
दिल्ली में भी कर चुके थे कोशिश
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इससे पहले वे दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में भी नकली टिकट बेचने की कोशिश कर चुके थे, लेकिन वहां सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने डिजाइन और प्रिंटिंग तकनीक में सुधार कर लखनऊ को निशाना बनाया।
गिरोह का सदस्य विश्वजीत साहू 2D और 3D डिजाइनिंग का काम जानता था, जिसे उसने यूट्यूब और कोचिंग के माध्यम से सीखा था। वहीं, श्रीकांत बोरकर को गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
ये सामान हुआ बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 15 फर्जी IPL टिकट, 14 प्रिंटेड टिकट शीट, ASUS लैपटॉप, 4 मोबाइल फोन, पेपर कटर, प्रिंटिंग सामग्री, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और छत्तीसगढ़ नंबर की एक रिट्ज कार बरामद की है।
फिलहाल पुलिस गिरोह के नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य मामलों की जांच कर रही है।