राज्य से बाहर रहने की शर्त पर मिली राहत, कारोबारी अनवर ढेबर की जमानत याचिका पर सरकार से मांगा जवाब
ईओडब्ल्यू का दावा- आबकारी नीति और शराब सिंडिकेट संचालन में निभाई थी अहम भूमिका
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी निरंजन दास को जमानत दे दी है। अदालत ने ट्रायल लंबा चलने और सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिलने का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया। वहीं कारोबारी अनवर ढेबर की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से 3 जून तक जवाब मांगा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी निरंजन दास को जमानत दे दी। अदालत ने उन्हें राज्य से बाहर रहने की शर्त पर राहत प्रदान की है। वहीं, अवैध कमीशन और सीएसएमसीएल भ्रष्टाचार मामले में कारोबारी अनवर ढेबर की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। इसी आधार पर निरंजन दास को भी समान शर्तों के साथ जमानत दी गई।
जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू के अनुसार, पूर्व आबकारी आयुक्त रहे निरंजन दास शराब सिंडिकेट के प्रमुख किरदारों में शामिल थे। आरोप है कि उन्होंने आबकारी नीति तैयार करने से लेकर पूरे नेटवर्क के संचालन तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किस जिले में कौन अधिकारी पदस्थ होगा, किस कंपनी की शराब बिकेगी और किन ब्रांड्स की सप्लाई होगी, जैसे फैसले उनके स्तर पर तय किए जाते थे।
ईओडब्ल्यू का दावा है कि आईटीएस अधिकारी एपी त्रिपाठी के साथ मिलकर निरंजन दास ने करीब तीन वर्षों तक पूरे सिस्टम को संचालित किया। जांच में यह भी सामने आया कि उन्हें इस नेटवर्क के जरिए 30 करोड़ रुपए से अधिक का कमीशन मिला।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में बताया गया कि निरंजन दास ने आबकारी नीति को इस तरह तैयार किया, जिससे चुनिंदा कारोबारियों और कंपनियों को फायदा पहुंचा। इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें 18 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि निरंजन दास केवल जांच और कोर्ट में पेशी के लिए ही छत्तीसगढ़ आ सकेंगे। इसके अलावा उन्हें राज्य से बाहर रहना होगा ताकि गवाहों और जांच को प्रभावित न किया जा सके।
इधर, कारोबारी अनवर ढेबर ने भी सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को 3 जून तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इससे पहले 13 मई को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट उनकी जमानत अर्जी खारिज कर चुका है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, प्रदेश में हुए कथित शराब घोटाले की रकम करीब 3200 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। मामले में अब तक कई बड़े अफसर, कारोबारी और पूर्व मंत्री जांच के घेरे में आ चुके हैं।
गौरतलब है कि शराब, कोयला, डीएमएफ और अन्य आर्थिक घोटालों से जुड़े मामलों में अब तक कई चर्चित आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है। इनमें Kawasi Lakhma समेत कई पूर्व आईएएस अधिकारी और कारोबारी शामिल हैं। अदालत ने अधिकांश मामलों में आरोपियों को राज्य से बाहर रहने की शर्त पर जमानत दी है।