राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में अधिवक्ताओं की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर लंबे समय से उठ रही मांगों को जल्द कानूनी स्वरूप मिल सकता है। राज्य अधिवक्ता परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर अधिवक्ताओं के हितों और सुरक्षा से जुड़ी 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम को लेकर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आवश्यक पहल का भरोसा दिलाया।
प्रतिनिधिमंडल ने अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए विशेष कानून लागू करने की मांग को प्रमुखता से उठाया। परिषद का कहना है कि न्यायिक कार्यों के दौरान अधिवक्ताओं को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों और जोखिमों का सामना करना पड़ता है, इसलिए उनके लिए अलग संरक्षण कानून की आवश्यकता है।
परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि ‘छत्तीसगढ़ अधिवक्ता संरक्षण विधेयक-2020’ का प्रारूप पहले ही तैयार किया जा चुका है। इसके कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को हाल ही में विधि एवं विधायी कार्य विभाग की बैठक में स्वीकृति भी मिल चुकी है। अब इसे आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत कर पारित कराने की मांग की गई है।
सहायता राशि बढ़ाने की मांग
बैठक में मृतक अधिवक्ताओं के आश्रित परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वर्तमान में अधिवक्ता कल्याण निधि और मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान योजना से कुल 3 लाख रुपए की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। परिषद ने दोनों मदों में वृद्धि कर कुल सहायता राशि 5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव रखा है।
अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि न्याय व्यवस्था को प्रभावी, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने में अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है तथा उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
बैठक में राज्य अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पराशर, अनुशासन समिति के अध्यक्ष प्रशांत प्रभात तिवारी सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।