बिलासपुर में 17.24 करोड़ के कथित फर्जीवाड़े की जांच तेज, 14 एफआईआर दर्ज; विधायक ने उठाए जांच पर सवाल
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सर्पदंश से मौत के नाम पर करोड़ों रुपए के मुआवजे में कथित अनियमितताओं का मामला लगातार गहराता जा रहा है। जांच के दौरान फर्जी दस्तावेज, संदिग्ध मौत के दावे और विभागीय मिलीभगत जैसे कई पहलू सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
बिलासपुर। बिलासपुर जिले में सर्पदंश से मौत के मामलों में मुआवजा वितरण को लेकर सामने आए कथित घोटाले की जांच अब बड़े स्तर पर पहुंच गई है। विधानसभा में मामला उठने के बाद जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक इस प्रकरण में 14 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि एक अन्य मामले में भी शिकायत प्रक्रिया जारी है।
मामले को विधानसभा में उठाने वाले बेलतरा विधायक ने जांच की गति और दायरे पर असंतोष जताते हुए कहा है कि करीब 400 मामलों से जुड़े इस कथित फर्जीवाड़े की गहराई से जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में जशपुर जिले में सर्पदंश से 96 मौतें दर्ज हुईं, जबकि अकेले बिलासपुर जिले में 431 मौतों के आधार पर 17 करोड़ 24 लाख रुपए के मुआवजे के वितरण की बात सामने आई है। इसी असमानता के बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
प्राथमिक जांच में स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग और अन्य कार्यालयों से जुड़े कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ शुरू की है और कुछ मामलों में दस्तावेजों की सत्यता की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ मामलों में सामान्य मौतों को कथित रूप से सर्पदंश से हुई मौत बताकर मुआवजा लेने के लिए दस्तावेज तैयार किए गए। आरोप है कि फर्जी पंचनामा, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी सहायता राशि स्वीकृत कराई गई।
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी मौत को सर्पदंश साबित करने के लिए पंचनामा, स्थानीय गवाहों की पुष्टि और मेडिकल रिपोर्ट जैसी प्रक्रिया जरूरी होती है। ऐसे में बिना विभागीय स्तर पर मिलीभगत के इतनी बड़ी राशि जारी होना जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है।
फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ आगे बढ़ने के साथ इस मामले से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।