भारतीय पासपोर्ट धारकों को सिर्फ 26 देशों में वीजा-फ्री या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा, चीन सहित कई देशों से पीछे रहा भारत
विदेश यात्रा के लिहाज से भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक स्थिति में इस वर्ष मामूली गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2026 के ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स में भारत 125वें स्थान पर पहुंच गया है। रैंकिंग में एक पायदान की गिरावट के साथ भारत एक बार फिर शीर्ष 100 देशों की सूची से बाहर हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय नागरिक फिलहाल केवल 26 देशों में बिना पूर्व वीजा या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं।
नई दिल्ली (ए)। अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधा और पासपोर्ट की ताकत को लेकर जारी वर्ष 2026 के ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स में भारत की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। नई सूची के अनुसार भारतीय पासपोर्ट 125वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष भारत 124वें स्थान पर था, लेकिन इस बार एक पायदान नीचे खिसकने से वह फिर से शीर्ष 100 देशों की सूची से बाहर हो गया है।
रिपोर्ट बताती है कि भारतीय पासपोर्ट धारक वर्तमान में दुनिया के केवल 26 देशों और क्षेत्रों में बिना पूर्व वीजा, वीजा ऑन अराइवल अथवा सरल प्रवेश सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की यात्रा क्षमता कई अन्य देशों की तुलना में सीमित बनी हुई है।
रैंकिंग में भारत नामीबिया, फिलीपींस, मोरक्को और उज्बेकिस्तान जैसे देशों से पीछे रहा है, जबकि अजरबैजान और किर्गिस्तान जैसे कुछ देशों से बेहतर स्थिति में बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वीजा-मुक्त पहुंच की संख्या किसी भी देश के पासपोर्ट की वैश्विक स्वीकार्यता और कूटनीतिक संबंधों को दर्शाती है।
भारतीय यात्रियों के लिए राहत की बात यह है कि भूटान, नेपाल, जमैका, मकाऊ, फिलिस्तीन, ट्यूनीशिया, अंगोला और बारबाडोस सहित कई देशों में उन्हें बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा उपलब्ध है। इसके विपरीत अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, चीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख देशों की यात्रा के लिए भारतीय नागरिकों को पहले से वीजा प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।
पड़ोसी देशों की तुलना में चीन का प्रदर्शन भारत से बेहतर रहा है और उसे इस सूची में 104वां स्थान मिला है। हालांकि दक्षिण एशिया के कई देशों की तुलना में भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। बांग्लादेश 166वें और नेपाल 164वें स्थान पर हैं, जबकि पाकिस्तान 188वें पायदान पर पहुंचकर दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों में शामिल हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक रैंकिंग में सुधार के लिए देशों के साथ यात्रा और वीजा संबंधी समझौतों का विस्तार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आने वाले वर्षों में भारत की कूटनीतिक और आर्थिक पहुंच बढ़ने के साथ पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार की संभावना भी जताई जा रही है।