प्रश्नकाल में जल जीवन मिशन सहित कई मुद्दों पर सरकार से जवाब-तलब, अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की सचिन तेंदुलकर वाली टिप्पणी से सदन में गूंजे ठहाके
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में राजनीतिक माहौल गर्म रहने के आसार हैं। कांग्रेस विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी, जबकि प्रश्नकाल में जल जीवन मिशन, पेयजल, कानून-व्यवस्था, शिक्षा और औद्योगिक सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी है। सदन की कार्यवाही के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की हल्की-फुल्की टिप्पणी से माहौल भी कुछ देर के लिए खुशनुमा हो गया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस की पृष्ठभूमि तैयार हो गई है। कांग्रेस आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी। राज्य गठन के बाद विधानसभा में यह दसवां अविश्वास प्रस्ताव होगा।
सत्र की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, जहां भाजपा विधायक भैय्यालाल राजवाड़े ने जल जीवन मिशन से जुड़े सवाल उठाए। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा, “सचिन तेंदुलकर बहुत दिनों बाद बैटिंग करने उतरे हैं, पुराने खिलाड़ी हैं।” उनकी इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके गूंज उठे।
चर्चा की तारीख तय करेंगे विधानसभा अध्यक्ष
अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के बाद आवश्यक संसदीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष इस पर चर्चा की तिथि निर्धारित करेंगे। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष सरकार के कामकाज पर सवाल उठाएगा, जबकि सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों और योजनाओं का पक्ष रखेगा।
इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस
कांग्रेस ने विधायक दल की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया था। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने पहले ही इसकी घोषणा कर दी थी। विपक्ष नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को प्रमुख मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
वहीं प्रश्नकाल में जल जीवन मिशन, रायपुर की पेयजल व्यवस्था, औद्योगिक दुर्घटनाएं, शराब दुकानों के संचालन, सरकारी आयोजनों पर खर्च तथा प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों सहित कई विषयों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
संख्या बल सरकार के पक्ष में
विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का एक विधायक भी सदन में है। ऐसे में संख्या बल स्पष्ट रूप से सरकार के पक्ष में है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम है, लेकिन बहस के दौरान सरकार और विपक्ष दोनों को अपनी-अपनी बात रखने का व्यापक अवसर मिलेगा।
अब तक कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं हुआ सफल
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में अब तक नौ बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं, लेकिन कोई भी सरकार बहुमत परीक्षण में नहीं हारी। पहली विधानसभा में वर्ष 2002 और 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी सरकार के खिलाफ भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था।
इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ 2007, 2011, 2015, 2017 और 2018 में कांग्रेस ने पांच बार अविश्वास प्रस्ताव लाया। वहीं भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ 2022 और 2023 में भाजपा ने प्रस्ताव पेश किया था। सभी प्रस्ताव बहुमत के अभाव में खारिज हो गए।
सबसे लंबी बहस जुलाई 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी। ऐसे में इस बार भी सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।