प्रभावित गांवों और आश्रमों में व्यापक स्क्रीनिंग, पॉजिटिव मरीजों को तत्काल दवा और रेफरल की सुविधा उपलब्ध
रायपुर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले में मलेरिया से जुड़ी दो बच्चों की मौत के मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। विभाग ने दोनों प्रकरणों में जांच, उपचार, रेफरल और क्षेत्रीय निगरानी की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करते हुए बताया कि प्रभावित इलाकों में मलेरिया मुक्त अभियान के तहत लगातार जांच और स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार समय पर पहचान, उपचार और निगरानी के माध्यम से संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
आश्रम में बच्चों की सामूहिक जांच, संक्रमित विद्यार्थियों का उपचार
कोंडागांव जिले के ग्राम डुडेरापाल निवासी 10 वर्षीय सुभाष कुमेटी केशकाल विकासखंड के बालक आश्रम मर्दापोटी में रहकर पढ़ाई कर रहा था। 21 जुलाई को आश्रम के दो बच्चों को बुखार आने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां आरडी किट जांच में पीएफआर पॉजिटिव मिलने पर चिकित्सकों ने एसीटी और प्राइमाक्वीन की पहली खुराक दी।
अगले दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आश्रम के सभी 46 बच्चों की जांच की, जिसमें दो अन्य बच्चों में भी पीएफआर संक्रमण पाया गया और उनका उपचार शुरू किया गया। उसी दौरान सुभाष की आरएफएस जांच निगेटिव रही। 24 जुलाई को दोबारा जांच में सुभाष पीएफआर पॉजिटिव पाया गया, जिसके बाद उसे उपचार की पहली खुराक दी गई और शेष दवा आश्रम प्रबंधन को सौंप दी गई।
25 जुलाई की सुबह परिजन सुभाष को अपने गांव ले गए। रात में तबीयत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल कांकेर में भर्ती कराया गया, जहां 26 जुलाई को उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
डोमाहर्रा गांव में तीन बहनों में मिला संक्रमण
दूसरे मामले में कांकेर विकासखंड के ग्राम डोमाहर्रा निवासी तीजाराम विश्वकर्मा अपनी तीन बेटियों रवीना (11 वर्ष), करीना (9 वर्ष) और सलीना (5 वर्ष) को 23 जुलाई को बुखार की शिकायत पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर लेकर पहुंचे। आरडी किट जांच में तीनों बच्चियां पीएफआर पॉजिटिव पाई गईं।
स्वास्थ्य कर्मियों ने तत्काल एसीटी और प्राइमाक्वीन की पहली खुराक दी तथा शेष दवा परिजनों को उपलब्ध कराई। उसी दिन घर और आसपास के क्षेत्र में भी मलेरिया सर्वे किया गया।
24 जुलाई को तीजाराम की प्रारंभिक जांच निगेटिव आई, लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें 108 एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनेलीकन्हार भेजा गया। वहां पुनः जांच में वे भी पीएफआर पॉजिटिव पाए गए और उनका उपचार शुरू किया गया। इसी दौरान करीना की हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज कांकेर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
मलेरिया मुक्त अभियान के तहत लगातार निगरानी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दोनों प्रभावित क्षेत्रों में 22 जुलाई को मलेरिया मुक्त अभियान के अंतर्गत व्यापक जांच की गई थी, जिसमें संबंधित जांच रिपोर्ट निगेटिव मिली थी। विभाग ने स्पष्ट किया कि बुखार के मामलों की पहचान, त्वरित जांच, समय पर दवा उपलब्ध कराना और आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफरल की प्रक्रिया लगातार जारी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश
विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य टीमों और स्थानीय प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी रखने, संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच कराने और मलेरिया नियंत्रण गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और समय पर उपचार ही मलेरिया से होने वाली जटिलताओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।