संभाजीनगर की दो दिवसीय बैठक में आंदोलन की समीक्षा, शिक्षा, E20 और संगठन विस्तार पर मंथन; झारखंड के छात्रों को समर्थन देने का ऐलान
छत्रपति संभाजीनगर (ए)। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि संगठन फिलहाल राजनीतिक पार्टी के रूप में चुनावी राजनीति में प्रवेश नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश को किसी नए राजनीतिक दल से अधिक एक मजबूत जनदबाव समूह और व्यापक जन-आंदोलन की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से CJP प्रेशर ग्रुप के रूप में अपनी गतिविधियां जारी रखेगी और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए अभियान चलाएगी।
बुधवार से छत्रपति संभाजीनगर में CJP की दो दिवसीय कोर कमेटी बैठक शुरू हुई, जिसमें अभिजीत दीपके, मुख्य प्रवक्ता सौरव दास सहित 13 सदस्य शामिल हुए। बैठक में दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन की समीक्षा, शिक्षा व्यवस्था, E20 पेट्रोल नीति, संगठन के राष्ट्रीय विस्तार और आगामी जन अभियानों की रणनीति पर चर्चा की जा रही है।
मीडिया से बातचीत में दीपके ने कहा कि जंतर-मंतर आंदोलन की सफलता का कारण यह था कि विभिन्न विचारधाराओं और राजनीतिक दलों से जुड़े लोग लोकतंत्र को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियों के खिलाफ एक मंच पर आए। उनका कहना था कि यदि CJP उस समय राजनीतिक दल के रूप में सामने आती, तो आंदोलन को इतना व्यापक समर्थन नहीं मिलता।
दीपके ने यह भी घोषणा की कि संगठन झारखंड जाकर आंदोलनरत छात्रों के साथ खड़ा होगा और उनकी सभी लोकतांत्रिक मांगों का समर्थन करेगा। उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक व्यवस्था, न्यायपालिका, मीडिया और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास कमजोर हुआ है और इसे पुनर्स्थापित करने के लिए व्यापक जनदबाव आवश्यक है।
मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR हटाने के मुद्दे पर सरकार से बातचीत जारी है। संगठन घायल छात्रों को कानूनी और चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक संगठन के मार्गदर्शक बने रहेंगे और समय-समय पर CJP को सलाह देते रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि CJP ने 20 जून से 25 जुलाई तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और युवा शामिल हुए। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस लाठीचार्ज के बाद आंदोलन और तेज हुआ था, जबकि 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन ने अपना धरना समाप्त करने की घोषणा की थी।