स्मृतिनगर पुलिस ने छात्रावासों में लगाया जागरूकता शिविर, ओटीपी-पिन साझा नहीं करने और ठगी होने पर तुरंत 1930 पर सूचना देने की दी सलाह
मोबाइल पर आने वाला एक अनजान लिंक, फर्जी कॉल या ओटीपी साझा करने की छोटी सी चूक बैंक खाते में जमा पूरी रकम पर भारी पड़ सकती है। साइबर अपराध के बढ़ते तरीकों से छात्राओं को सतर्क करने के लिए स्मृतिनगर पुलिस ने दुर्ग के दो छात्रावासों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें करीब 150 से 200 छात्राओं और कर्मचारियों को ऑनलाइन ठगी के तरीके और उससे बचाव के उपाय बताए गए।
रायपुर। साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कभी बैंक अधिकारी, कभी पुलिसकर्मी तो कभी नौकरी, इनाम और सरकारी योजनाओं का झांसा देकर लोगों की निजी जानकारी हासिल की जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्मृतिनगर पुलिस ने पोस्ट मैट्रिक स्नातकोत्तर अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास और पोस्ट मैट्रिक अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम में एसआई बसंत पटेल ने छात्राओं को बताया कि साइबर ठग फोन पर डर और लालच दोनों का सहारा लेते हैं। कई बार बैंक खाता बंद होने, केवाईसी अपडेट, नौकरी मिलने या लोन स्वीकृत कराने का झांसा देकर गोपनीय जानकारी मांगी जाती है। वहीं कुछ मामलों में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का भय दिखाया जाता है और वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ का दबाव बनाया जाता है।
डर और जल्दबाजी में न करें कोई गलती
पुलिस अधिकारियों ने समझाया कि साइबर ठगों का मुख्य हथियार लोगों की घबराहट और जल्दबाजी होती है। वे इस तरह बातचीत करते हैं कि व्यक्ति को सोचने और जांचने का मौका ही न मिले। ऐसे में किसी भी अनजान कॉल पर तुरंत भरोसा करने के बजाय संबंधित संस्था से आधिकारिक माध्यम से जानकारी लेना जरूरी है।
छात्राओं को स्पष्ट किया गया कि बैंक या सरकारी विभाग फोन पर ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी, पासवर्ड अथवा मोबाइल बैंकिंग की गोपनीय जानकारी नहीं मांगते। अनजान लिंक खोलने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने और सोशल मीडिया पर अपरिचित लोगों से संपर्क बढ़ाने से भी बचना चाहिए।
ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत
पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए घटना का पता चलते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके साथ ही संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को सूचना देकर खाते और लेन-देन पर जरूरी कार्रवाई कराने का प्रयास करना चाहिए।
छात्राओं को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के बारे में भी जानकारी दी गई। पुलिस ने कहा कि समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
छात्राओं ने भी रखे सवाल
कार्यक्रम के दौरान छात्रावास की छात्राओं और स्टाफ ने साइबर ठगी से जुड़े कई सवाल पूछे। पुलिस अधिकारियों ने संदिग्ध कॉल, फर्जी संदेश, लिंक और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराधों से बचने के तरीके समझाए। साथ ही छात्राओं से अपील की गई कि वे स्वयं सतर्क रहने के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।