विवेचना पूरी होने के बाद अभियोग पत्र पेश करने की तैयारी, डायरी में नाम और लेन-देन के ब्योरे को लेकर हुई थी पूछताछ
दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी प्रकरण में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव को नोटिस जारी किया है। एजेंसी ने उन्हें 5 अक्टूबर को सुबह 10.30 बजे रायपुर स्थित विशेष न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में विवेचना पूरी होने के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
इस मामले में सितंबर के अंतिम सप्ताह में भी देवेंद्र यादव से EOW कार्यालय में पूछताछ की गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ में सूर्यकांत तिवारी से संबंधित जांच के दौरान सामने आई एक डायरी में दर्ज नाम और कथित लेन-देन से जुड़ी जानकारी को आधार बनाया गया था। देवेंद्र यादव ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
15 जुलाई 2020 से शुरू हुई थी व्यवस्था
जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले की शुरुआत 15 जुलाई 2020 से हुई। उस दौरान कोयला परिवहन की ऑनलाइन अनुमति व्यवस्था में बदलाव कर मैन्युअल प्रक्रिया शुरू की गई थी। आरोप है कि इसी व्यवस्था के बाद कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से प्रति टन 25 रुपए की अवैध वसूली का सिलसिला शुरू हुआ।
जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच इस माध्यम से करीब 540 करोड़ रुपए की वसूली किए जाने का आरोप है। जांच में रायगढ़, कोरबा और सूरजपुर सहित कोयला उत्पादक क्षेत्रों में इस व्यवस्था के संचालित होने की बात सामने आई थी।
डायरी में नाम मिलने के बाद पूछताछ
जांच के दौरान सूर्यकांत तिवारी से संबंधित दस्तावेजों और डायरी में कथित तौर पर पैसों के लेन-देन का ब्योरा मिलने की बात कही गई है। इसी जांच के दौरान देवेंद्र यादव का नाम सामने आने के बाद EOW ने उनसे पूछताछ की। अब एजेंसी मामले में उनकी भूमिका से जुड़े तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया बढ़ा रही है।
जांच एजेंसियों ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित तौर पर वसूली गई रकम का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों, चुनावी खर्च और संपत्ति खरीदने में किया गया। इन आरोपों और डायरी में दर्ज लेन-देन के बीच संबंध की जांच जारी है।
2024 में EOW ने दर्ज किया था मामला
कोयला परिवहन की अनुमति के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया में बदलाव के बाद मैन्युअल मंजूरी की व्यवस्था लागू हुई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल कोयला कारोबारियों से अवैध रकम वसूलने के लिए किया गया। मामले में EOW ने जनवरी 2024 में अपराध दर्ज किया था। प्रकरण में अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक लोगों समेत कई नाम जांच के दायरे में आए हैं।
अब EOW की ओर से मामले में अभियोग पत्र विशेष न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।