जांच एजेंसी का दावा- विधायक देवेंद्र यादव ने चुनाव, IAS जयप्रकाश मौर्य ने संपत्ति और पूर्व विधायक चंद्रदेव राय ने जेवर खरीदने में खर्च किए करोड़ों रुपए
छत्तीसगढ़ के 570 करोड़ रुपए के कथित कोल लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) सोमवार को विशेष न्यायालय में अंतिम आरोप पत्र पेश करेगी। इस मामले में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, आईएएस जयप्रकाश मौर्य और रामगोपाल अग्रवाल सहित 9 आरोपियों को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कोयला कारोबार से अवैध वसूली गई रकम का इस्तेमाल नेताओं और अधिकारियों ने चुनावी खर्च, संपत्ति खरीदी और आभूषण खरीदने में किया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में जांच एजेंसी की कार्रवाई अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। EOW की ओर से सोमवार को विशेष न्यायालय में अंतिम चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इस मामले में जिन 9 लोगों को समन जारी किया गया है, उनमें कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, रामगोपाल अग्रवाल, आईएएस जयप्रकाश मौर्य और दीपेश टांक सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। सभी को 5 अक्टूबर को न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
EOW की जांच में आरोप लगाया गया है कि कोयला कारोबार से वसूली गई अवैध रकम का इस्तेमाल नेताओं और अधिकारियों ने अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया। जांच एजेंसी के मुताबिक, विधायक देवेंद्र यादव को 11 किस्तों में करीब 3 करोड़ रुपए मिले, जिनका उपयोग खैरागढ़ उपचुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किया गया। वहीं, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय ने दो बार में 46 लाख रुपए प्राप्त किए। इनमें से 42 लाख रुपए उत्तर प्रदेश चुनाव में खर्च किए गए, जबकि 4 लाख रुपए से रायपुर की एक ज्वेलरी दुकान से पत्नी के लिए करीब 60 ग्राम सोने का हार खरीदा गया।
इसी तरह आईएएस जयप्रकाश मौर्य पर कोल लेवी से मिली रकम का इस्तेमाल संपत्ति खरीदने में करने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट में दावा किया गया है कि घोटाले की कुल रकम में से सबसे अधिक लाभ 8 नेताओं और अधिकारियों को मिला। इसमें संपत्ति खरीदने, आभूषण लेने और चुनावी गतिविधियों में करोड़ों रुपए खर्च करने की बात सामने आई है।
डायरी में 80 करोड़ से अधिक के लेन-देन का उल्लेख
जांच के दौरान कारोबारी सूर्यकांत तिवारी की डायरी में 80 करोड़ रुपए से अधिक के लेन-देन का ब्योरा मिलने का दावा किया गया है। ED की चार्जशीट के अनुसार, सूर्यकांत तिवारी से सौम्या चौरसिया ने 169 बार में करीब 31 करोड़ रुपए लिए, जबकि निलंबित आईएएस रानू साहू को 13 बार में 5.52 करोड़ रुपए दिए गए। आरोप है कि कोल वाशरी संचालकों और ट्रांसपोर्टरों से वसूली गई रकम सूर्यकांत तिवारी अपने कर्मचारियों के माध्यम से नेताओं और अधिकारियों तक पहुंचाता था। इस काम में निखिल चंद्राकर की प्रमुख भूमिका बताई गई है।
100 रुपए प्रति टन की होती थी वसूली
ED की जांच के मुताबिक, कोल लेवी वसूली का नेटवर्क कोरबा और रायगढ़ सहित कोयला कारोबार से जुड़े क्षेत्रों में सक्रिय था। आरोप है कि कोल वाशरी संचालकों से प्रति टन 100 रुपए और वाशरी से कोयला बाहर निकलने पर अतिरिक्त 25 रुपए प्रति टन ट्रांसपोर्टिंग शुल्क लिया जाता था। कारोबारियों को दो स्तर पर भुगतान करना पड़ता था। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर कार्यालय भी बनाए गए थे। वसूली गई रकम का प्रबंधन सूर्यकांत तिवारी करता था और कथित तौर पर नेताओं तथा अधिकारियों तक उनकी भूमिका और समझौते के अनुसार राशि पहुंचाई जाती थी।