ईडी के मुताबिक, रायपुर के राजीव भवन तक पहुंचाई गई शराब सिंडिकेट की रकम; पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष की अनुपम नगर और कटोरा तालाब स्थित संपत्तियों पर कार्रवाई, घोटाले में अब तक 610.34 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अटैच, जब्त या फ्रीज
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की करीब 9.06 करोड़ रुपये की दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। ईडी का आरोप है कि शराब सिंडिकेट से जुटाई गई 860 से 880 करोड़ रुपये की रकम रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचाई गई थी। एजेंसी के मुताबिक, इस लेनदेन की निगरानी रामगोपाल अग्रवाल कर रहे थे। मामले में 9 अक्टूबर को रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में उनके खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है।
कांग्रेस कार्यालय तक रकम पहुंचाने का आरोप
ईडी की जांच के अनुसार, शराब सिंडिकेट से प्राप्त रकम के प्रबंधन में लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल की भूमिका थी। एजेंसी का आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर नकदी रायपुर के शंकर नगर स्थित राजीव भवन पहुंचाई जाती थी। वहां उनके साथ काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र डढ़सेना को रकम सौंपे जाने का दावा किया गया है। ईडी के मुताबिक, करीब 72 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में थे और उनके निर्देश पर इस रकम को रखने, इस्तेमाल करने या बांटने की व्यवस्था की जाती थी। एजेंसी ने अपने आरोपों के समर्थन में डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों का हवाला दिया है।
दो फ्लैटों पर कार्रवाई, अदालत में पूरक शिकायत
ईडी ने 8 अक्टूबर को रामगोपाल अग्रवाल की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने का आदेश जारी किया था। रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब स्थित दो फ्लैटों की कुल कीमत करीब 9.06 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके बाद 9 अक्टूबर को विशेष पीएमएलए अदालत में उनके खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की गई। रामगोपाल अग्रवाल को 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह न्यायिक हिरासत में हैं।
610 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर कार्रवाई
ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में अब तक 601.28 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की गई थीं। रामगोपाल अग्रवाल की संपत्तियों पर कार्रवाई के बाद यह राशि बढ़कर करीब 610.34 करोड़ रुपये हो गई है। इस मामले में एजेंसी ने रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में एक मूल अभियोजन शिकायत और छह पूरक अभियोजन शिकायतें दाखिल की हैं। जांच के दौरान पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और चैतन्य बघेल समेत कई लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
2,883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप
ईडी का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच शराब सिंडिकेट ने विभिन्न तरीकों से 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय जुटाई। इसमें देशी शराब की आपूर्ति, बिना हिसाब की शराब की बिक्री, डिस्टिलर्स से कथित कमीशन और विदेशी शराब के लाइसेंस से जुड़े लेनदेन शामिल बताए गए हैं। एजेंसी की जांच में तत्कालीन सरकार के कार्यकाल के दौरान अधिकारियों और कारोबारियों के कथित गठजोड़ के जरिए इस व्यवस्था को संचालित किए जाने का आरोप लगाया गया है।
अन्य लाभार्थियों की पहचान में जुटी एजेंसी
ईडी अब कथित अवैध कमाई से लाभ उठाने वाले अन्य लोगों की पहचान करने और रकम के लेनदेन की कड़ियों का पता लगाने में जुटी है। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच एजेंसी के आरोपों और अदालत में दाखिल शिकायतों के आधार पर मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।