बोले- 2018 में जीत के बाद शपथ की तैयारी, 2023 में हार के बाद मशीनों पर आरोप; टैक्स समिट में जीएसटी और एआई पर भी चर्चा
दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दुर्ग में आयोजित टैक्स समिट के दौरान कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने वर्ष 2018 और 2023 के विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि जीत के समय कांग्रेस ने सरकार बनाने की तैयारी की, जबकि हार के बाद ईवीएम को लेकर सवाल उठाए गए। चौधरी ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक कार्यशैली बताते हुए कहा कि जनता चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से अपना निर्णय देती है।
पत्रकारों से बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था संविधान पर आधारित है। यहां सत्ता परिवर्तन चुनाव के जरिए होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें अराजकता के माध्यम से व्यवस्था को प्रभावित करना चाहती हैं। चौधरी के अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने से जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश की जाती है।
कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी को विभिन्न राज्यों में चुनावी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कांग्रेस को डूबती नाव बताते हुए दावा किया कि जनता उसे लगातार नकार रही है। ये टिप्पणियां चौधरी ने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कीं।
टैक्स चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पर कार्रवाई
राजनीतिक बयानबाजी के अलावा चौधरी ने कर व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि जीएसटी से संबंधित मामलों में छोटी तकनीकी गलतियों और जानबूझकर की गई कर चोरी के बीच अंतर किया जाना चाहिए। मामूली त्रुटियों पर अनावश्यक कठोरता के बजाय व्यावहारिक समाधान अपनाया जा सकता है।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि फर्जी बिलिंग के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी रिश्वत मांगता है, तो उसके विरुद्ध एसीबी और ईओडब्ल्यू के जरिए कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।
कर व्यवस्था में तकनीक की भूमिका बढ़ाने पर जोर
टैक्स बार एसोसिएशन के आयोजन में जीएसटी सुधारों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। चौधरी ने कहा कि जीएसटी ने देश की कर व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं और कर प्रक्रियाओं को सरल बनाने में भूमिका निभाई है।
उन्होंने टैक्स अधिवक्ताओं को कारोबारियों और सरकार के बीच महत्वपूर्ण सेतु बताया। उनके अनुसार, कर संबंधी सेवाओं में एआई और आधुनिक तकनीक के उपयोग से कामकाज अधिक प्रभावी हो सकता है। इससे व्यापारिक गतिविधियों को सुविधा मिलेगी और प्रदेश की आर्थिक प्रगति को भी सहयोग मिल सकता है।