– अमेरिकी अखबार का दावा- अमेरिकी सेना ने किया हमला, ईरानी मीडिया ने नहीं की पुष्टि
– ईरान ने दो अमेरिकी जासूसी ड्रोन मार गिराने का किया दावा, वीडियो भी जारी
– ट्रंप ने हमले की संभावना से किया इनकार, बोले- तेहरान समझौते के लिए तैयार
तेहरान (ए)। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान से कुछ घंटे पहले ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केश्म द्वीप पर सोमवार को लगातार पांच धमाके होने से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। द्वीप के अलावा बंदर लेंगेह शहर में भी विस्फोटों की खबर सामने आई है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि इन धमाकों के पीछे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई थी। हालांकि, ईरान की ओर से अब तक हमले के लिए अमेरिका या इजराइल को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
इस घटनाक्रम के बीच ईरान ने दो अमेरिकी एमक्यूएम-170 जासूसी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। ईरान के सरकारी टेलीविजन चैनल आईआरआईबी ने कथित कार्रवाई का वीडियो फुटेज भी प्रसारित किया है। केश्म द्वीप पर धमाकों की खबर के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई। सामने आए दृश्यों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं। लोग संभावित संकट को देखते हुए जरूरी ईंधन और ऊर्जा संसाधन जुटाते नजर आए।
सामरिक लिहाज से बेहद अहम है द्वीप
केश्म ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है, जो करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश क्षेत्र में स्थित होने के कारण इसका सामरिक और आर्थिक महत्व काफी अधिक है। पहले यह पर्यटन और मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, लेकिन समय के साथ यहां सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, द्वीप के नीचे सुरंगों और नमक की गुफाओं का विस्तृत नेटवर्क है, जिसका इस्तेमाल सैन्य ठिकानों और उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
माना जाता है कि ईरान ने यहां तटीय मिसाइल प्रणालियां और तेज गति से हमला करने वाली नौकाएं तैनात कर रखी हैं। इस क्षेत्र से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया जा सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में केश्म द्वीप पर किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
ट्रंप ने समझौते की जताई उम्मीद
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि फिलहाल अमेरिका ईरान पर दोबारा हमले की तैयारी नहीं कर रहा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद सैन्य कार्रवाई की संभावना से जुड़े सवाल पर भी उन्होंने इनकार में जवाब दिया। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है और दोनों देशों के बीच बड़े संघर्ष की आशंका कम हुई है।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा कि युद्ध की आशंका घटने से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई है। उनके अनुसार, 31 अक्टूबर को तेल का भाव 118 डॉलर प्रति बैरल था, जो 1 नवंबर को घटकर 108 डॉलर पर आ गया। हालांकि, केश्म द्वीप पर हुए धमाकों के बाद क्षेत्रीय तनाव और संभावित सैन्य टकराव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है।