छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त मंत्री ओपी चौधरी 3 मार्च को बजट पेश करेंगे। बजट बनाने की यह प्रक्रिया करीब 180 दिनों तक चलती है, जिसमें 1000 से अधिक लोगों की टीम काम करती है और 40 से ज्यादा बैठकें होती हैं। राज्य की 75% आय वेतन और सब्सिडी में खर्च होती है, जबकि सिर्फ 25% बजट ही विकास कार्यों के लिए बचता है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार का बजट एक लंबी और विस्तृत प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाता है। बजट सत्र आमतौर पर फरवरी के अंत या मार्च में आयोजित होता है, लेकिन इसके निर्माण की प्रक्रिया करीब 6 महीने पहले ही शुरू हो जाती है। रिटायर्ड प्रमुख सचिव गणेश शंकर मिश्र, जो 2008 से 2017 तक बजट प्रक्रिया से जुड़े रहे, बताते हैं कि बजट वित्तीय वर्ष के लिए एक रोडमैप की तरह होता है, जिसमें यह तय किया जाता है कि कितनी आय कहां से आएगी और उसका व्यय कैसे किया जाएगा।
कैसे तैयार होता है बजट?
बजट निर्माण में विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़े 500 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल होते हैं। वित्त विभाग के तहत 40 से अधिक महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जाती हैं, जिनमें मंत्रियों, सचिवों और संगठनों से सुझाव लिए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 1000 लोगों की टीम काम करती है, ताकि राज्य की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर बजट का निर्माण किया जा सके।
राज्य की आय और खर्च का गणित
छत्तीसगढ़ एक खनिज आधारित राज्य है, जहां सरकार की नियमित आय कोयला और लौह अयस्क (आयरन ओर) से होती है। इसके अलावा, सरकार की राजस्व आय में 80% हिस्सा जीएसटी, सीएसटी, एक्साइज, पंजीयन शुल्क और अन्य करों से आता है। साथ ही, प्रॉपर्टी टैक्स, केंद्र सरकार से मिलने वाला अनुदान और विभिन्न दंड वसूलियों से भी सरकार को आय प्राप्त होती है।
आय का उपयोग कैसे होता है?
छत्तीसगढ़ सरकार की कुल आय का 75% हिस्सा वेतन, पेंशन और सब्सिडी जैसी योजनाओं में खर्च हो जाता है। केवल 25% बजट ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास में लगाया जाता है। इस बार के बजट में राज्य सरकार किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी, यह 3 मार्च को साफ हो जाएगा। फिलहाल, बजट निर्माण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है, और सभी संबंधित विभाग इसे अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।