धान खरीदी, पेयजल संकट, मास्टर प्लान की गड़बड़ियों और ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था समेत कई सवालों पर सरकार को घेरेगी विपक्ष
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को 15वें दिन प्रवेश कर गया है और सदन में आज खासा हंगामा होने की संभावना है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पक्षों की ओर से अहम मुद्दों पर सवाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लगाए गए हैं। धान के उठाव में देरी, पेयजल संकट, सरकारी नौकरियों की स्थिति और मास्टर प्लान की विसंगतियां सदन की कार्यवाही को तीखा बना सकती हैं।
धान उठाव बना बहस का केंद्र
विधानसभा में कांग्रेस नेताओं ने धान के उठाव में हो रही देरी को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। उनका आरोप है कि किसानों को भुगतान में विलंब हो रहा है और इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
पानी की किल्लत पर भाजपा का सवाल
भाजपा विधायक मोतीलाल साहू रायपुर में पीने के पानी की समस्या को सदन में उठाएंगे। गर्मी की दस्तक के साथ ही जल संकट उभरने लगा है, जिस पर जवाबदेही तय करने की मांग होगी।
ग्रामीण बैंकिंग और नौकरी भर्ती पर भी चर्चा
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं की कमी, सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े मुद्दे भी सदन में उठाए जाएंगे। विपक्ष इन मसलों को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर सकता है।
मास्टर प्लान पर उठे गंभीर सवाल
रायपुर के विधायक राजेश मूणत ने शहर के मास्टर प्लान को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आवासीय क्षेत्रों को बिना सोच-समझ के व्यवसायिक और शैक्षणिक उपयोग के लिए बदल दिया गया है, जिससे आम नागरिकों को परेशानी हो रही है।
मंत्री ने स्वीकारीं शिकायतें
विभागीय मंत्री ओपी चौधरी ने लिखित जवाब में स्वीकार किया कि मास्टर प्लान को लेकर शिकायतें मिली हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है, जो आरोपों की जांच कर रही है।
कौन हैं मास्टर प्लान तैयार करने वाले अधिकारी?
विधायक मूणत ने सवाल किया था कि मास्टर प्लान बनाने में किन अधिकारियों की भूमिका रही। जवाब में ओपी चौधरी ने बताया कि इसमें IAS जयप्रकाश मौर्य, संदीप बागडे, भानु प्रताप सिंह पटेल, कमल सिंह, रोजी सिन्हा, मेघा चवढ़ा सहित 15 अधिकारी शामिल रहे।